लद्दाख में चीनी सेना के सामने डटे हैं गढ़वाल राइफल्स के शूरवीर

लद्दाख में चीनी सेना के सामने डटे हैं गढ़वाल राइफल्स के शूरवीर

लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प को चार महीने का समय पूरा हो चुका है। तब से लेकर अब तक लद्दाख सीमा पर भारत और चीन की सेनाएं युद्ध के लिए तैयार बैठी हैं। लेह से 200 किलोमीटर दूर पूर्वी लद्दाख के चुमार डेमचौक सीमा पर भारतीय सेना के जवान और टैंक चीन के छक्के छुड़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

कई दौर की कमांडर स्तर की वार्ता के बावजूद भारत और चीन के बीच लद्दाख में चल रहा गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। गलवान घाटी में 15 जून को हुई हिंसक झड़प के बाद से उत्पन्न हालात दिन-प्रतिदिन खराब होते जा रहे हैं। चीन लगातार सीमा पर सैनिकों की संख्या बढ़ा रहा है, इसलिए भारत ने चीन की हर चाल को नाकाम बनाने के लिए युद्ध स्तर की तैनाती कर रखी। लदाख में टी-90 और टी-72 विध्वंसक टैंक तैनात है। इन टैंकों के साथ-साथ इंफेंट्री कॉम्बेक्ट वार ह्वीकल्स को भी तैनात कर दिया गया है। चीन को मुंहतोड़ जवाब देने की जिम्मेदारी 6 मैकेनाइज्ड बटालियन को दी गई है। गढ़वाल राइफल्स की पहली बटालियन के जवान 6 मैकेनाइज्ड का हिस्सा हैं। यानी लद्दाख में चीन के सामने ‘गढ़वाल राइफल्स’ के शूरवीर सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़े हैं।

16,000 फीट से लेकर 18,000 फीट की ऊंचाई पर डेमचौक में सिंधु नदी के किनारे हजारों मील में फैली घाटी में शून्य से नीचे के तापमान में भारतीय सेना के जवान, टी-90 टैंक और बीएमपी चीन के खिलाफ हुंकार भर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर कुछ ही मिनटों में ये टैंक चीन की सरहद में घुसकर उसके ठिकानों को नेस्तनाबूद कर सकते हैं। भारत और चीन की सेनाओं के बीच बातचीत के जरिये मसले को सुलझाने की कोशिशें हो रही हैं। लेकिन भारतीय सेना के तेवर से साफ है कि वह किसी भी मोर्चे पर चीन के खिलाफ अपनी तैयारियों में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती।

दुनिया के सबसे अचूक टैंक तैनात हैं लद्दाख में

पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनातनी के बीच भारत ने दुनिया के सबसे अचूक टैंक माने जाने वाले टी-90 भीष्म टैंक को तैनात कर रखा है। इसकी तैनाती को भारतीय सेना का सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि इनकी तैनाती का मतलब है कि भारतीय सेना युद्ध जैसे हालात के लिए हर पल पूरी तरह तैयार है। टी-90 भीष्म टैंक मिसाइल हमले को रोकने वाले कवच से लैस है। इसमें 1,000 हॉर्स पावर का शक्तिशाली इंजन है। यह एक बार में 550 किलोमीटर की दूरी तय करने में सक्षम है। इस टैंक का वजन 48 टन है। यह दुनिया के हल्के लेकिन शक्तिशाली टैंकों में से एक है। यह टैंक दिन और रात में दुश्मन से लड़ने की क्षमता रखता है।

 

एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल का भी खौफ

अभी तक बीएमपी को सिर्फ रेगिस्तान और पानी वाले इलाकों में ही काम में लिया जा रहा था। अब यह ऊंचे पहाड़ी इलाकों में भी दुश्मन से मुकाबला करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल से लैस बीएमपी किसी भी ठिकाने को आसानी से शिकार बना सकता है। लद्दाख में मौजूद सैनिकों का जोश हाई है और वे टैंक, बीएमपी चलाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

सैनिकों के लिए खास प्रीफैबरीकेटेड हट्स लंबे समय की तैयारी

भारतीय सेना के आला अधिकारियों के मुताबिक, सर्दियों को देखते हुए भारतीय सेना ने अपनी तैयारियों को पूरी तरह से चाक-चौबंद कर लिया है। सर्दियों के लिए राशन, हथियार, तेल, सैनिकों के रहने के लिए खास इंतजाम किए जा रहे हैं। यहां पर न सिर्फ चीनी सेना दुश्मन है बल्कि मौसम भी एक बड़ा दुश्मन है। बर्फबारी शुरू हो चुकी है और अब तापमान शून्य से 20 से लेकर 40 डिग्री नीचे जाने वाला है, ऐसे में यहां सैनिकों के रहने के लिए खास तरह के टेंट और प्रीफैबरीकेटेड हट्स तैयार किए जा रहे हैं। इन हट्स में जवानों की रहने, खाने हर तरह की सुविधा का ध्यान रखा गया है। यहां शून्य से नीचे के तापमान में जवान आराम से रह सकें, इसके खास इंतजाम किए गए हैं।

चीन की चालबाजी को देखते हुए लद्दाख में चीन से लगने वाले ऊंचे पहाड़ी इलाकों में सेना युद्ध स्तर पर ऐसे टेंट और प्रीफैबरीकेटेड हट्स तैयार कर रही है। इसके साथ ही लगातार इन इलाकों में भी सेना के लिए हथियार और जरूरी साजो सामान पहुंचाने का काम भी युद्धस्तर पर चल रहा है। भारतीय सेना के हजारों सैनिक मुश्किल हालात में हर उस पहाड़ी और घाटी में मौजूद हैं, जहां से चीन घुसपैठ कर सकता है। गलवान की खूनी भिड़ंत के बाद अब भारतीय सेना चीन को कोई मौका नहीं देना चाहती, इसलिए भारतीय सेना दक्षिणी पेनग्योंग झील की कई सामरिक चोटियों पर काबिज हो चुकी है।

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