विद्यार्थियों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी मध्याह्न भोजन (मिड डे मील) योजना में कथित अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। राज्य के कई जिलों और विकासखंडों के विद्यालयों में खाद्यान्न वितरण, उपभोग और अभिलेखों में संभावित विसंगतियों की पड़ताल की जाएगी।
जानकारी के अनुसार विभाग को पिछले कुछ समय से विभिन्न माध्यमों के जरिए मिड डे मील योजना के संचालन में गड़बड़ियों संबंधी शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों तथा नागरिकों द्वारा यह आरोप लगाया गया कि कुछ विद्यालयों में छात्र संख्या के अनुपात से अधिक खाद्यान्न की प्रविष्टियां दर्ज की गई हैं। साथ ही खाद्यान्न की प्राप्त मात्रा और वास्तविक उपयोग के बीच अंतर होने जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं।
इन शिकायतों के मद्देनजर हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिले के रामनगर तथा हल्द्वानी क्षेत्रों के विद्यालयों को जांच के दायरे में लिया गया है। इसके अलावा पौड़ी जिले के कोटद्वार तथा देहरादून जिले के डोईवाला, रायपुर, विकासनगर और सहसपुर ब्लॉकों के विद्यालयों में भी विशेष जांच कराई जाएगी। विभागीय अधिकारियों को रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, उपस्थिति विवरण और खाद्यान्न उपभोग संबंधी दस्तावेजों का गहन सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं।
मध्याह्न भोजन योजना देश की सबसे महत्वपूर्ण छात्र कल्याण योजनाओं में से एक मानी जाती है। इसका उद्देश्य सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है, ताकि कुपोषण को कम किया जा सके और विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बढ़े। ऐसे में योजना के संचालन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सीधे तौर पर विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और अधिकारों को प्रभावित कर सकती है।
शिक्षा विभाग का कहना है कि जांच के दौरान खाद्यान्न आवंटन, वितरण और उपभोग से जुड़े सभी अभिलेखों का मिलान किया जाएगा। यदि कहीं भी रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में अंतर पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मिड डे मील जैसी योजनाओं में नियमित सामाजिक ऑडिट, डिजिटल निगरानी और सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने से अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। कई राज्यों में ऑनलाइन मॉनिटरिंग और रियल टाइम डेटा एंट्री जैसी व्यवस्थाओं से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उत्तराखंड में भी ऐसी व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो न केवल दोषियों पर कार्रवाई होगी, बल्कि योजना के संचालन तंत्र में सुधार के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। वहीं अभिभावकों और स्थानीय लोगों को भी निगरानी प्रक्रिया में सहयोग करने तथा किसी भी अनियमितता की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की अपील की गई है।
मिड डे मील योजना लाखों विद्यार्थियों के लिए पोषण का महत्वपूर्ण स्रोत है। इसलिए इसकी पारदर्शिता और प्रभावशीलता बनाए रखना न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी है, बल्कि बच्चों के भविष्य और उनके स्वास्थ्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व भी है। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों में कितनी सच्चाई है और योजना के संचालन में सुधार के लिए किन कदमों की आवश्यकता है।








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