Sunday , 6 September 2026
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उत्तराखंड न्यूज़ताज़ा ख़बरपौड़ी गढ़वालसरोकार

वोकल फार लोकल और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती ईशा कलूड़ा चौहान की हस्त निर्मित राखियां

ऋषिकेश क्षेत्र में हर्बल रंगों व गाय के गोबर से निर्मित होली के रंगों के साथ हस्त निर्मित इको फ्रेंडली राखियां में क्रांति लाने वाली वह पहली महिला है जिन्होंने इस कार्य में सबका ध्यान खींचा है। हम बात कर रहे हैं ऋषिकेश की ईशा कलूड़ा चौहान की। वह कहती है कि सीजन के त्यौहार में अगर कोई कार्य करे तो कोई भी त्यौहार हमारा खाली नहीं रहता है और इससे रोजगार के अवसर ही प्रदान होते हैं।

क्योंकि किसी भी कार्य को करने के लिए दो महीने पहले ही तैयारी शुरू हो जाती है और त्यौहार के निपटने के बाद फिर से कोई ना कोई त्यौहार ही जाता है। करवा चौथ के अवसर पर घर पर उनकी एप्पल से सुसज्जित कलश व थाल की काफी डिमांड रहती है। दीपावली के समय उनके दीपक व मोमबत्ती के साथ सजावट के सामान के लिए उन्हें एडवांस आर्डर पहले से ही दिया जाता है।

यह राखियां ऑर्डर पर भी बनाई जाती है, क्योंकि इनको बनाने की विधि थोड़ी सी लंबी है, प्रकृति से प्राप्त होने के बावजूद पहले इनका ट्रीटमेंट किया जाता है, फिर इनको इनके आकार व डिजाइन प्रदान करके, इनको खूबसूरती से पैकिंग भी की जाती है।

हमारे गढ़वाल में पाए जाने वाले भीमल का रेशा व चीड़ की पत्तियां जिसे पील्टू भी कहते हैं, यह सब प्रकृति की देन है, व प्रकृति के अनुकूल भी है। ईशा चौहान के द्वारा पिछले वर्ष भीमल पर 45 राखियों के डिजाइन व पीरुल राखियों 30 डिजाइन पर काम किया गया। दो महीने तक काम किया गया, व गाय के गोबर पर पांच डिजाइन हुआ बार व मिट्टी से तीन डिजाइन पर काम किया गया। इनके साथ फैंसी राखियां इन वस्तुओं में काम करके पर्यावरण के साथ-साथ गौ संरक्षण करके लोकल फार वोकल का संदेश भी दिया गया है।

ईशा चौहान द्वारा बताया गया कि इन कार्यों को करने में आपको किसी बड़े स्थान की वह किसी बड़े बजट की आवश्यकता नहीं होती है आप खुद के पैसों से इन कार्यों को करके रोजगार से जुड़ सकते हैं।

ईशा चौहान व उनसे जुड़ी महिलाओं द्वारा बनाई गई राखियां जितनी सुंदर और आकर्षक है, उतनी ही खुशबूदार भी है, जो भाई की कलाई को चार चांद लगाने के साथ भीनी भीनी खुशबू से महकायेगी भी, और भाई बहन के रिश्ते को और भी मजबूती प्रदान करेगा। ईशा चौहान ने बताया है कि उनके द्वारा बनाई गई राखियां उनकी ही कल्पना और रचना का मिश्रण है, ना ही किसी का नकल करके इन्हें बनाया गया है। उन्होंने इस बार 100 राखियां के डिजाइन पर ही काम किया है, और इन डिजाइनों को अन्य बहनों को समर्पित भी किया है कि आप इन पर कार्य कीजिए क्योंकि किसी डिजाइन को बनाने में बड़ी ही मेहनत और समय के साथ बड़ी मशक्कत करनी होती है जो अब किसी को नहीं करनी पड़ेगी।

इस बार कई स्वयं सहायता समूहों ने उनके साथ मिलकर काम किया है जिनमें एकता समूह, प्यारी पहाड़न, पहाड़ी नोनी, मेरु पहाड़, सौभाग्य देवभूमि, सरस्वती समूह के साथ स्थानीय महिलाओं व बच्चों ने भी राखियां बनाई हैं।

राखी बनाने में जिन महिलाओं ने उनके साथ काम किया है वह हैं सोनिया बलोदी, रुचि बंदोलिया, दीपा, मंजीता, सुमन रानी, नंदिनी, प्रतिष्ठा, गीता घंनाता, रचना, ज्योति उनियाल, पूनम रतूड़ी, आरती, कांति जोशी, आशा, आराधना, रेनू रतूड़ी आदि शामिल हैं।

Written by
Hill Mail

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