भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) को देहरादून में फ्रंटियर हेड क्वॉर्टर के लिए लगभग 15 एकड़ भूमि मिलेगी। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आईटीबीपी के महानिदेशक एसएस देशवाल और बल के दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात के दौरान देहरादून के जिलाधिकारी को इस संबंध में निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना के तहत क्षेत्रीय विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह योजना भारत सरकार द्वारा चलाई जाने वाली सीमांत क्षेत्र विकास योजना के साथ चलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सीमांत क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से पलायन रोकने में मदद मिलेगी। उन्होंने राज्य के सीमांत क्षेत्रों से पलायन रोकने को देश की सुरक्षा से जुड़ा विषय बताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना के लिए 10 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में आईटीबीपी के महानिदेशक एसएस देशवाल, बल के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों एवं शासन के उच्च अधिकारियों के बीच आइटीबीपी से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सीमांत जनपदों के सीमा क्षेत्रों में आईटीबीपी की चौकियों को नियमित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की कार्ययोजना अविलंब तैयार की जाए।
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उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में सीपीडब्ल्यूडी द्वारा निर्मित सड़कों की मरम्मत बीआरओ द्वारा की जाए, इन क्षेत्रों में मोबाइल टावरों की स्थापना के लिए भारत सरकार से अनुरोध किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी देहरादून को आईटीबीपी को फ्रंटियर हेड क्वॉर्टर के लिए लगभग 15 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को स्मृति चिह्न भेंट करते आईटीबीपी के महानिदेशक एसएस देशवाल और साथ में हैं नवगठित पश्चिमी कमान के आईजी मनोज रावत।
सचिव राजस्व को आईटीबीपी को उनके जोशीमठ कैंपस की भूमि का स्वामित्व प्रदान करने के लिए प्रस्ताव कैबिनेट में लाने के भी निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने महानिदेशक आइटीबीपी को आश्वस्त किया कि उनके द्वारा सीमांत क्षेत्रों में आवाजाही बढ़ाई जाने एवं इन क्षेत्रों से लोगों का पलायन रोकने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि आईटीबीपी द्वारा साहसिक पर्यटन की गतिविधियों के प्रति विशेष ध्यान दिए जाने के साथ ही इससे संबंधित तकनीकी दक्षता भी है। उन्होंने इसके लिए पर्यटन एवं आईटीबीपी के अधिकारियों का वर्किंग ग्रुप बनाए जाने तथा विंटर टूरिज्म सेल से समन्वय बनाने पर भी बल दिया।
मुख्यमंत्री ने सीमांत क्षेत्र विकास के तहत सीमांत क्षेत्रों के ट्रैक रूटों की मरम्मत के लिए आईटीबीपी को धनराशि उपलब्ध कराने, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में औषधीय वनस्पति के उत्पादन पर ध्यान देने, दूरस्थ सीमांत क्षेत्रों मलारी, माणा, हर्षिल, नेलांग जैसे क्षेत्रों मे पर्यटन से संबंधित योजनाओं में शामिल करने पर भी ध्यान देने को कहा, इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने आईटीबीपी को राज्य सरकार द्वारा यथा संभव सहयोग का भी आश्वासन दिया गया।

बैठक में आईटीबीपी के महानिदेशक एसएस देशवाल ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में उनकी 5 बटालियन हैं। मसूरी अकादमी के साथ ही फ्रंटियर हेड क्वार्टर भी यहां से संचालित होता है। उन्होंने फ्रंटियर हेड क्वार्टर के लिए देहरादून के आस पास 15 एकड़ भूमि की व्यवस्था करने का अनुरोध करते हुए जोशीमठ की भूमि का स्वामित्व प्रदान करने एवं उनकी सीमांत 42 चौकियों में ग्रिड से बिजली आपूर्ति, सीपीडब्ल्यूडी द्वारा सीमांत क्षेत्रों में निर्मित सड़कों के रखरखाव, चौकियों के आसपास मोबाइल टावरों की स्थापना आदि की भी बात रखी।
उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि सीमांत क्षेत्रों के गांवों में आवाजाही बढ़ाने के प्रयास किए जाएं। सीमा क्षेत्रों में आवाजाही से वहां तैनात बलों को भी सुविधा रहती है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों द्वारा बॉर्डर तक आवाजाही बढ़ाई गई है हमें भी अपने क्षेत्रों में केवल अपने देश के लोगों को इनर लाइन परमिट की व्यवस्था करनी चाहिए। अभी इन क्षेत्रों में ग्रास लैंड के लिए ही कैटल ग्रीजिंग के लिए परमिट जारी किए जाते हैं।
इस अवसर पर सचिव लोक निर्माण आरके सुधांशु, सचिव ऊर्जा श्रीमती राधिका झा, सचिव राजस्व सुशील कुमार, विशेष सचिव मुख्यमंत्री पराग मधुरकर धकाते, जिलाधिकारी देहरादून आशीष श्रीवास्तव, अपर सचिव पर्यटन सुश्री सोनिका, आईटीबीपी आईजी एसएस रावत, आईजी नीलाभ किसौर, डीआईजी श्रीमती अर्पणा कुमार, डिप्टी कमांडेट आशीष शर्मा, आईटीबीपी के पीआरओ राजीव नेगी उपस्थित थे।


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