जापान के आध्यात्मिक गुरु ने ग्रामीणों को दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

जापान के आध्यात्मिक गुरु ने ग्रामीणों को दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

जापान के आध्यात्मिक गुरु श्री बाला कुंभ गुरु मुनि (ताकायुकी होशी) अपने दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर पहुंचे। उत्तराखंड आगमन पर उन्होंने सबसे पहले धर्मनगरी हरिद्वार में मां गंगा के पावन तट पर स्नान किया तथा विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती में शामिल होकर देश-दुनिया की सुख-समृद्धि, शांति और मानव कल्याण की कामना की।

इसके बाद उन्होंने यमकेश्वर विकासखंड के तल्ला बनास में आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम में भाग लिया। यहां उन्होंने प्राचीन हनुमान मंदिर में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की तथा भजन-कीर्तन और हवन में सहभागिता की। गुरु मुनि ने तल्ला बनास के ग्रामीणों तथा कार्यक्रम के आयोजक मनजीत नेगी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा बिल्कुल नहीं लगा कि वे पहली बार उत्तराखंड आए हैं।

उन्होंने कहा, “देवभूमि के लोगों का स्नेह, अपनापन और यहां की दिव्यता ने मेरे हृदय को छू लिया है। देवभूमि के कण-कण में भगवान शिव का वास है। स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे यहां आने का अवसर मिला। यहां आकर ऐसा अनुभव हो रहा है मानो मेरा पूर्व जन्म इसी पवित्र भूमि पर हुआ हो।”

उन्होंने सभी लोगों से अपने जीवन में आध्यात्मिकता अपनाने, सनातन संस्कृति से जुड़े रहने तथा सेवा, करुणा और सद्भाव के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। साथ ही भविष्य में उत्तराखंड में एक आश्रम स्थापित करने की इच्छा भी व्यक्त की, जहां योग, ध्यान, आध्यात्मिक साधना और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार का कार्य व्यापक स्तर पर किया जा सके।

कार्यक्रम के दौरान गुरु मुनि ने रुद्राक्ष का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति की सेवा ही ईश्वर की सच्ची आराधना है और आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण का संरक्षण हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।

इस दौरान गौमुख डेयरी परिसर में गौ सेवा कर उन्होंने समाज को गौ संरक्षण एवं गौ सेवा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौ माता का विशेष स्थान है और उनकी सेवा मानव कल्याण एवं आध्यात्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके बाद उन्होंने गौमुख डेयरी की गायों को प्रसाद भी खिलाया।

गुरु मुनि के विचारों और आध्यात्मिक संदेश को सुनने के लिए क्षेत्रभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीण, युवा एवं महिलाएं कार्यक्रम में पहुंचे। श्रद्धालुओं ने उनका पारंपरिक ढंग से स्वागत किया तथा आध्यात्मिक संवाद में भाग लिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का वातावरण बना रहा।

जापान में भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, योग, ध्यान और सनातन संस्कृति के प्रति लोगों का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। भारत को लंबे समय से विश्व की आध्यात्मिक राजधानी और ‘विश्वगुरु’ के रूप में देखा जाता रहा है। ऐसे में जापान के नागरिकों और आध्यात्मिक संस्थाओं का भारत के प्रति बढ़ता रुझान दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती प्रदान कर रहा है।

श्री बाला कुंभ गुरु मुनि लंबे समय से सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार तथा भारत-जापान के आध्यात्मिक संबंधों को सुदृढ़ बनाने की दिशा में सक्रिय हैं। उनका यह भारत दौरा केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच आध्यात्मिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में भी देखा जा रहा है।

इस अवसर पर कार्यक्रम के आयोजक मनजीत नेगी द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों, श्रद्धालुओं एवं अतिथियों ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन ने भारत और जापान के बीच आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने का संदेश दिया।

कार्यक्रम के उपरांत गुरु मुनि हरिद्वार स्थित निरंजनी अखाड़ा पहुंचे। वे निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर भी हैं। यहां उन्होंने संतों, महात्माओं और विभिन्न आध्यात्मिक गुरुओं से मुलाकात कर सनातन धर्म के वैश्विक प्रचार-प्रसार तथा समकालीन आध्यात्मिक विषयों पर विचार-विमर्श किया।

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