सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता
जेवर एयरपोर्ट की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसकी यात्री क्षमता शामिल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एयरपोर्ट को सालाना लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने के हिसाब से विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना 1,300 हेक्टेयर से अधिक भूमि में फैली हुई है। इसके संचालन से दिल्ली-एनसीआर में हवाई यात्रा की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली-एनसीआर में यह इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बाद दूसरा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट होगा। राजधानी क्षेत्र में यात्रियों की बढ़ती संख्या के कारण मौजूदा हवाई अड्डे पर दबाव बना रहता है। ऐसे में जेवर एयरपोर्ट के विकसित होने से हवाई यातायात का बोझ बांटने और यात्रियों को वैकल्पिक सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
भारत का पहला नेट-जीरो उत्सर्जन एयरपोर्ट बनने की तैयारी
जेवर एयरपोर्ट की एक अन्य प्रमुख विशेषता पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी है। इसे भारत का पहला नेट-जीरो उत्सर्जन एयरपोर्ट बनाने की योजना बताई गई है। नेट-जीरो उत्सर्जन का उद्देश्य ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना और शेष उत्सर्जन की भरपाई के उपाय करना है। इस दिशा में आधुनिक तकनीक और पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
यदि यह लक्ष्य निर्धारित योजना के अनुरूप हासिल होता है, तो एयरपोर्ट देश में टिकाऊ विमानन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। इससे आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी को भी प्राथमिकता देने का संदेश मिलेगा।
### मेट्रो, हाई स्पीड रेलवे और पार्किंग की सुविधा
यात्रियों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए एयरपोर्ट परिसर में ग्राउंड ट्रांसपोर्टेशन सेंटर विकसित किया गया है। इसके तहत मल्टीमॉडल ट्रांजिट की व्यवस्था प्रस्तावित है, जिससे यात्रियों को परिवहन के अलग-अलग साधनों के बीच बेहतर संपर्क मिल सकेगा।
योजना के अनुसार, एयरपोर्ट को मेट्रो और हाई स्पीड रेलवे स्टेशनों से जोड़ने की व्यवस्था होगी। इसके अतिरिक्त टैक्सी, बस सेवा और निजी वाहनों के लिए पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध कराने की योजना है। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य यात्रियों को एयरपोर्ट तक पहुंचने और वहां से अपने गंतव्य तक जाने में सहूलियत देना है।
क्षेत्र के विकास को मिलेगी गति
जेवर एयरपोर्ट को दिल्ली-एनसीआर के परिवहन ढांचे के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। बेहतर हवाई संपर्क से क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन, निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावनाएं हैं। नाम बदलने के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के साथ ही परियोजना को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।





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