नेपाली पोटर्स पर सख्ती से संकट में कालिंदी पास ट्रेक, पर्यटन कारोबार पर मंडराया खतरा

नेपाली पोटर्स पर सख्ती से संकट में कालिंदी पास ट्रेक, पर्यटन कारोबार पर मंडराया खतरा

उत्तरकाशी के विश्वप्रसिद्ध कालिंदी पास ट्रेक पर इस बार प्रशासनिक नियमों का ऐसा असर पड़ा है कि साहसिक पर्यटन कारोबार ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। नेपाली मूल के पोटर्स से पासपोर्ट और वीजा अनिवार्य किए जाने के फैसले के बाद ट्रेकिंग एजेंसियों, गाइडों और स्थानीय कारोबारियों में भारी नाराजगी है। गढ़वाल हिमालय ट्रैकिंग एवं माउंटेनियरिंग संगठन ने प्रशासन से नियमों में तत्काल शिथिलता लाने की मांग करते हुए जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी भटवाड़ी को ज्ञापन सौंपा है।

संगठन का कहना है कि 5,950 मीटर ऊंचे और अत्यंत दुर्गम कालिंदी पास ट्रेक पर भारी सामान और पर्वतारोहण उपकरण ढोने के लिए नेपाली पोटर्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। वर्षों से नेपाली श्रमिक इस कार्य में दक्ष रहे हैं और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में ट्रेकिंग अभियानों की रीढ़ माने जाते हैं। ऐसे में अचानक पासपोर्ट और वीजा की अनिवार्यता लागू होने से दर्जनों राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ट्रेकिंग दलों ने अपनी बुकिंग रद्द करनी शुरू कर दी है।

संगठन अध्यक्ष जपेन्द्र सिंह राणा ने कहा कि स्थानीय स्तर पर इतने प्रशिक्षित और अनुभवी पोटर्स उपलब्ध नहीं हैं, जो कालिंदी पास जैसे जोखिमपूर्ण ट्रेक पर काम कर सकें। उनका कहना है कि स्थानीय युवा इस कठिन मजदूरी वाले कार्य में रुचि नहीं दिखाते। ऐसे में नेपाली श्रमिकों के बिना ट्रेक संचालन करना पर्यटकों की सुरक्षा से समझौता करने जैसा होगा।

राणा ने यह भी कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना, बीआरओ, आईटीबीपी और बीएसएफ जैसी एजेंसियां नेपाली श्रमिकों से केवल पहचान पत्र और पुलिस सत्यापन के आधार पर काम लेती हैं, जबकि पर्यटन क्षेत्र में पासपोर्ट-वीजा की अनिवार्यता लागू करना व्यवहारिक नहीं है। उन्होंने भारत-नेपाल के बीच वर्ष 1950 में हुई शांति और मित्रता संधि का हवाला देते हुए कहा कि दोनों देशों के नागरिकों को बिना पासपोर्ट और वीजा के एक-दूसरे के देश में आने-जाने और निवास का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में वर्तमान नियम संधि की भावना के विपरीत प्रतीत होते हैं।

संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि नेपाली श्रमिकों के लिए पहले की तरह नेपाल नागरिकता प्रमाण पत्र, स्थानीय पुलिस सत्यापन और पंजीकृत ट्रेकिंग एजेंसी के हलफनामे के आधार पर इनर लाइन परमिट जारी किए जाएं। उनका कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला तो उत्तरकाशी का साहसिक पर्यटन उद्योग गंभीर संकट में फंस जाएगा। इसका असर केवल ट्रेकिंग एजेंसियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि होटल, होमस्टे, स्थानीय गाइड, घोड़ा-खच्चर संचालक और छोटे व्यापारियों की आजीविका पर भी पड़ेगा।

इधर, गंगा की स्वच्छता को लेकर भी उत्तरकाशी प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं। मणिकर्णिका घाट पर श्रद्धालुओं द्वारा खुलेआम कपड़े धोने के मामले सामने आए हैं। साबुन और डिटर्जेंट के उपयोग से गंगा का पानी प्रदूषित हो रहा है, जिससे जलीय जीवों और पर्यावरण पर खतरा बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि घाटों पर न तो चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और न ही प्रशासन की नियमित निगरानी दिखाई देती है।

श्रद्धालुओं का कहना है कि होटल और धर्मशालाओं में पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें नदी किनारे कपड़े धोने को मजबूर होना पड़ता है। लोगों ने प्रशासन से घाटों पर जागरूकता अभियान चलाने, चेतावनी बोर्ड लगाने और स्वच्छता नियमों को सख्ती से लागू करने की मांग की है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि एक ओर सरकार सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन बढ़ाने और “वाइब्रेंट विलेज” जैसी योजनाओं की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर ऐसे नियम और लापरवाही पर्यटन व्यवसाय और पर्यावरण दोनों के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं।

Hill Mail
ADMINISTRATOR
PROFILE

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

विज्ञापन

[fvplayer id=”10″]

Latest Posts

  • यमकेश्वर के लाल और उत्तराखंड के गौरव पत्रकार मनजीत नेगी सीडीएस कमेंडेशन पत्र से हुए सम्मानित

    यमकेश्वर के लाल और उत्तराखंड के गौरव पत्रकार मनजीत नेगी सीडीएस कमेंडेशन पत्र से हुए सम्मानित0

    सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने आजतक के कार्यकारी संपादक मनजीत नेगी को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ कमेंडेशन मेडल और प्रशंसा पत्र से किया सम्मानित, आजतक के कार्यकारी संपादक मनजीत नेगी को रक्षा क्षेत्र में उनकी निर्भीक पत्रकारिता के लिए चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया गया। सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित होने वाले ये देश के एक मात्र रक्षा पत्रकार हैं। सीडीएस ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ जनरल अनिल चौहान ने ३० मई को सेवानिवृत होने से पूर्व कई तीनों सेनाओं के कई अधिकारियों और जवानों को सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने सेनाओं के अलावा समाज के अलग अलग क्षेत्रों में बेहतरीन कार्य करने वाले कुछ चुनिंदा लोगों को सीडीएस कमनडेशन मेडल से सम्मानित किया। मनजीत नेगी उनमें से एक हैं। मनजीत नेगी पत्रकारिता के क्षेत्र में। पिछले 25 साल से कार्यरत हैं।

    READ MORE
  • अंडमान में मानसून की दस्तक, उत्तर भारत में लू का कहर; 22 मई तक हीटवेव का अलर्ट

    अंडमान में मानसून की दस्तक, उत्तर भारत में लू का कहर; 22 मई तक हीटवेव का अलर्ट0

    देश में मौसम ने दो अलग-अलग रंग दिखाने शुरू कर दिए हैं। एक ओर दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में दस्तक देकर बारिश की उम्मीद जगा दी है, वहीं दूसरी ओर उत्तर और मध्य भारत के कई राज्य भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में 22 मई तक लू चलने का अलर्ट जारी किया है।

    READ MORE
  • ऑपरेशन सिंदूर का शेर: स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक की वीरता ने दुश्मन के दिल में पैदा किया खौफ

    ऑपरेशन सिंदूर का शेर: स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक की वीरता ने दुश्मन के दिल में पैदा किया खौफ0

    भारतीय वायुसेना के जांबाज योद्धाओं की बहादुरी की कहानियां हमेशा देशवासियों के भीतर गर्व और राष्ट्रभक्ति की भावना जगाती रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक की, जिन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अदम्य साहस, असाधारण नेतृत्व और अद्भुत युद्ध कौशल का परिचय देकर भारतीय वायुसेना का मान बढ़ाया। दुश्मन के इलाके में आधी रात को अंजाम दिए गए इस बेहद जोखिम भरे मिशन में उन्होंने जिस धैर्य और सटीकता के साथ कार्रवाई की, वह आज भारतीय सैन्य इतिहास में वीरता की मिसाल बन चुकी है।

    READ MORE

Follow Us

Previous Next
Close
Test Caption
Test Description goes like this