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कुंभ मेले की तैयारियों से संत-समाज संतुष्ट, जूना अखाड़ा ने स्नान को लेकर अफवाहों को किया खारिज

जूना अखाड़े के मुख्य संरक्षक और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् के महामंत्री महंत हरि गिरि जी महाराज ने हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुंभ मेले की तैयारियों पर प्रसन्नता जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि सरकार और प्रशासन पूरी तत्परता से मेले की तैयारियों में जुटा है। हालांकि 20 फरवरी के बाद जैस परिस्थितियां होंगी उसी के अनुरूप संत-समाज सामूहिक रूप से कोई फैसला लेगा।

हिल-मेल से बातचीत में हरि गिरि जी महाराज ने कहा कि राज्य सरकार पूरी निष्ठा, श्रद्धा और सामर्थ्य के साथ कुंभ मेला 2021 आयोजित कराने में जुटी है। जो व्यवस्थाएं पहले करनी चाहिए, वो की जा रही हैं। पहला काम भीड़ को नियंत्रित करने की क्या व्यवस्था हो, इसका होता है। छोटे-छोटे पर्वों पर ही हरिद्वार में यातायात की समस्या बड़ी गंभीर हो जाती है। शनिवार और मंगलवार को ही हर की पैड़ी में लोग दो-दो घंटे खड़े रह जाते हैं।

उन्होंने सरकार की सराहना करते हुए कहा कि कुछ जो समस्याएं थीं, जैसे डबल पुलिया, ओवरब्रिज बनने के काम तेजी से हो रहे हैं। भारत सरकार के सहयोग से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देशन में युद्ध स्तर पर काम कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संतों से वार्तालाप कर सीएम रावत पूरी निष्ठा के साथ कामकाज में जुटे हैं।

 

महंत हरि गिरि जी महाराज ने कहा कि शासन द्वारा जो भी काम होना था, मेरे सामने सीएम ने सचिवों और नोडल अफसरों को निर्देशित किया कि वह खुद हर हफ्ते कार्य की प्रगति रिपोर्ट लेंगे। उन्होंने रोजाना निगरानी की भी बात कही है। यह अपने आप में बड़ी बात है।

उन्होंने मेलाधिकारी दीपक रावत की भी प्रशंसा की और कहा कि वह घाट, सड़क और अखाड़ों से जुड़े कार्यों की लगातार निगरानी, मौके पर जाकर मुआयना करते हैं। हालांकि उन्होंने आगे कहा कि हर विभाग में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो चाहते हैं कि कामकाज में देरी हो। कुछ अधिकारी-कर्मचारी निष्क्रिय भी हैं, जो चाहते हैं कि दीपक रावत काम में असफल हों। मेरा कहना है कि उनके कंधे पर मां गंगा ने बड़ी जिम्मेदारी दी है और मुझे विश्वास है कि उनके नेतृत्व में मेला शानदार तरीके से आयोजित होगा। लेकिन उनके सामने चुनौतियां भी होंगी। उन्हें सख्त निर्णय लेना होगा और अपने आसपास के लोगों की जांच करते रहना होगा। हरि गिरि जी महाराज ने कहा कि मेरा यही कहना है कि वह अपने आसपास के लोगों पर नियंत्रण रखें, कसौटी पर कसते रहें, मेला बहुत भव्य होगा।

उन्होंने कई अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है कि लोग स्नान करने न आएं। कुछ चीजें मेलाधिकारी, मुख्यमंत्री, भारत सरकार या साधु-संतों के हाथों में भी नहीं हैं, इन पर फैसला परस्थितियों को देखते हुए 20 फरवरी के बाद होगा।

उन्होंने कहा कि यह मेला 12 साल के बाद आता है। समस्त तीर्थों से सब लोग एकसाथ आना चाहते हैं। अखाड़े के संत हो या अन्य लोग, सभी आना चाहते हैं, ऐसे में समस्याएं विकट होती हैं। ऐसे ही समझिए कि जगह है 3 लोगों की, पर आने वाले 13 हैं। ऐसे में बाहर भी ठिकाने बनाने पड़ते हैं। ऐसे अखाड़ों के लिए भी है कि जहां 3 हैं, वहां 300 हो जाते हैं। अचानक एक असंतुलन की स्थिति पैदा हो जाती है।

ऐसे में हमें हर हालात को संभालने के लिए टॉयलट, टोंटी, सुरक्षाकर्मी, सफाईकर्मी चाहिए होंगे। 40 आदमी पर कम से कम एक सुरक्षाकर्मी की जरूरत होती है लेकिन 400 आ गए तो व्यवस्था फेल हो जाएगी। उत्तराखंड की आबादी और मेले में भीड़ को देखते हुए यही लगता है कि 500 की आबादी पर एक पुलिसकर्मी भी नहीं हो पाएगा। ऐसे में चुनौतियां अपार हैं और संसाधन कम हैं। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं, मां गंगा और दक्ष महादेव की कृपा बनी रहे और मेला दिव्य और भव्य आयोजित हो।

जूना अखाड़ा भी मेले को तैयारियों को देखते हुए व्यापक व्यवस्थाएं करा रहा है। अखाड़े में कई तरह का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसमें एशियन सत्कर्मा मिशन के संस्थापक और हिमालयन योगी स्वामी वीरेंद्रानंद अहम भूमिका निभा रहे हैं।

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Hill Mail

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