देहरादून में लंबे समय से बारिश न होने के कारण वायु प्रदूषण बढ़ गया है। एक्यूआई 200 के पार पहुंच गया, जिससे हवा ‘खराब’ श्रेणी में आ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार बारिश होने से राहत मिल सकती है, लेकिन तब तक बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
उत्तराखंड में लंबे समय से बारिश नहीं होने का असर अब साफ तौर पर लोगों की सेहत पर दिखने लगा है। राजधानी देहरादून समेत कई इलाकों में वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ा है और एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 200 के पार पहुंच गया है, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। मौसम की बेरुखी के चलते हवा में धूल और प्रदूषक कण जमा हो गए हैं, जिससे सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है।
देहरादून का एक्यूआई 207 दर्ज किया गया, जबकि काशीपुर में 128 और ऋषिकेश में 85 एक्यूआई रिकॉर्ड हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो आने वाले दिनों में हालात और खराब हो सकते हैं। खासतौर पर सुबह और रात के समय धुंध और स्मॉग की स्थिति बन रही है, जिससे दृश्यता भी प्रभावित हो रही है मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अक्टूबर और नवंबर के महीनों में सामान्य तौर पर कुछ दिनों की बारिश वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद करती है, लेकिन इस बार बारिश न होने से हवा में मौजूद धूल और धुएं के कण नीचे नहीं बैठ पा रहे हैं। इसके चलते मैदानी इलाकों के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों में भी ठंड और प्रदूषण लोगों को परेशान कर रहा है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सकों का कहना है कि बढ़ता प्रदूषण अस्थमा, एलर्जी, फेफड़ों के संक्रमण और हृदय रोगियों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। डॉक्टरों की सलाह है कि लोग अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें और जरूरत पड़ने पर मास्क का प्रयोग करें।
मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में चार दिन बाद बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई गई है। 20 दिसंबर तक मौसम शुष्क रहने की संभावना है, जबकि 21 और 22 दिसंबर को उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिलों के कुछ हिस्सों में बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है। इससे वायु प्रदूषण में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश होने से हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक तत्व जमीन पर बैठ जाते हैं, जिससे एक्यूआई में सुधार होता है। हालांकि यदि बारिश कमजोर रही तो प्रदूषण की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। वहीं, वाहनों की बढ़ती संख्या और निर्माण कार्य भी प्रदूषण बढ़ने का बड़ा कारण बन रहे हैं।
प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे खुले में कचरा न जलाएं और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों से बचें। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को सतर्क रहने और किसी भी प्रकार की सांस संबंधी समस्या होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की हिदायत दी है।








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