कॉमनवेल्थ गेम में लक्ष्य सेन ने बैडमिंटन में देश के लिए गोल्ड जीत लिया है। उनका मुकाबला मलेशिया के यॉन्ग से था और इन दोनों खिलाड़ियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। दोनों खिलाडियों के बीच पहलना मुकाबला काफी संघर्षपूर्ण रहा पहले गेम में लक्ष्य सेन को मलेशिया के खिलाड़ी ने 21-19 से हरा दिया। इसके बाद दूसरा गेम लक्ष्य सेन 9-21 के बड़े अंतर जीतने में कामयाब रहे। इसके बाद तीसरा गेम 16-21 से जीत लिया। इसके साथ ही भारत के खाते में 20वां गोल्ड आ गया। इस बड़ी उपलब्धि के बाद भारत समेत पूरे उत्तराखंड में जश्न का माहौल है।
इससे पहले लक्ष्य सेन ने थॉमस कप जीतकर इतिहास रचा था। इस जीत से उत्तराखंड के लक्ष्य सेन ने राज्य का सीना चौड़ा कर दिया था और अब कॉमनवेल्थ गेप में गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने एक नया इतिहास रचा है। अल्मोड़ा के लक्ष्य सेन की इस जीत पर पूरा देश जश्न मना रहा है। इससे पहले जसपाल राणा ने 1998 में कॉमनवेल्थ गेम में उत्तराखंड को शूटिंग में गोल्ड दिलाया था।
दादा और पिता भी खेल चुके हैं बैडमिंटन
अल्मोड़ा जिले के मध्यम वर्गी परिवार से निकले लक्ष्य सेन का जन्म 16 अगस्त 2001 को हुआ। उनका परिवार 80 वर्षों से अधिक समय से अल्मोड़ा के तिलकपुर मोहल्ले में रह रहा है। उनके दादा जी सीएल सेन जिला परिसद में नौकरी करते थे। दादा ने सिविल सर्विसेस में राष्ट्रीय स्तर की बैडमिंटन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था। वहीं कई खिताब अपने नाम किए। जबकि पिता डीके सेन भी वर्तमान में कोच हैं। पहले वह साई के कोच थे।
छह साल की उम्र से खेल रहे लक्ष्य
लक्ष्य को छह वर्ष के उम्र में मैदान पर उतारने में दादा जी का बड़ा योगदान रहा। दादा ने हाथ पकड़कर पोते लक्ष्य को बैडमिंटन पकड़ना सिखाया। पिता और दादा जी के नक्शे पर चले लक्ष्य ने भी बैडमिंटन में ही प्रतिभा दिखाई। लक्ष्य ने जिला, राज्य के बाद राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक अपने नाम किए। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पैट जमाई। 10 वर्ष की उम्र में लक्ष्य ने इजराइल में पहला अंतरराष्ट्रीय खिताब स्वर्ण पदक के रूप में जीता था।


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