पौड़ी जिले में सरकारी विद्यालयों की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। छात्र संख्या में लगातार गिरावट के कारण अब 30 विद्यालयों पर ताले लटक चुके हैं, जिनमें 24 प्राथमिक और 6 उच्च प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। यह स्थिति न केवल शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ाती है।
शिक्षा विभाग के अनुसार, अभिभावकों का रुझान तेजी से निजी विद्यालयों की ओर बढ़ रहा है। बेहतर सुविधाओं, अंग्रेजी माध्यम और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के आकर्षण के चलते सरकारी स्कूलों से दूरी बढ़ती जा रही है। जिले के 15 में से 13 विकासखंड ऐसे हैं जहां स्कूल बंद करने की नौबत आ चुकी है।
सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र यमकेश्वर ब्लॉक है, जहां पांच विद्यालयों में छात्र संख्या शून्य हो गई और उन्हें बंद करना पड़ा। वहीं बीरोंखाल में चार, पौड़ी, पाबौ और कल्जीखाल में तीन-तीन विद्यालय बंद हुए हैं। द्वारीखाल, दुगड्डा, पोखड़ा और एकेश्वर जैसे क्षेत्रों में भी दो-दो स्कूलों पर ताले लग चुके हैं। यह आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि समस्या व्यापक और गंभीर होती जा रही है।
इस वर्ष छात्र संख्या में 1,592 की गिरावट दर्ज की गई है। वर्तमान में कुल 15,381 छात्र ही सरकारी विद्यालयों में नामांकित हैं, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 16,973 थी। प्राथमिक स्तर पर 12,413 और उच्च प्राथमिक में 2,968 छात्र अध्ययनरत हैं। यह गिरावट शिक्षा तंत्र के लिए चेतावनी है।
जिला शिक्षा अधिकारी अंशुल बिष्ट के अनुसार, सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को 30 अप्रैल तक अंतिम रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, शून्य छात्र संख्या वाले विद्यालयों के शिक्षकों को अन्य स्कूलों में समायोजित किया जा रहा है। हालांकि, इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना अब समय की मांग बन चुका है।
यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में और भी विद्यालय बंद हो सकते हैं, जिससे ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को गहरा झटका लगेगा।







