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मां हारी नहीं… दो साल बाद बेटे के कातिल तक पहुंची, देहरादून में क्षितिज हिट एंड रन केस का खुलासा

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यह मामला 16 फरवरी 2024 की रात का है। प्रेमनगर क्षेत्र के हाईवे पर सहस्त्रधारा रोड निवासी 18 वर्षीय क्षितिज चौधरी को एक तेज रफ्तार डंपर ने कुचल दिया था। हादसा इतना भीषण था कि क्षितिज की मौके पर ही मौत हो गई। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। तीन दिन बाद 19 फरवरी को पुलिस ने मामले में केस दर्ज किया, लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ सकी।

काफी समय तक कोई सुराग न मिलने पर पुलिस ने अदालत में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी। पुलिस का कहना था कि आरोपी वाहन और चालक का पता नहीं चल पाया है। बेटे को खो चुकी मां ललिता चौधरी ने जब सवाल उठाए तो उन्हें यहां तक सुनना पड़ा कि पुलिस के पास “जादू की छड़ी” नहीं है, जिससे आरोपी तुरंत पकड़ लिया जाए। लेकिन इस ताने ने मां को कमजोर करने के बजाय और मजबूत बना दिया।

ललिता चौधरी ने खुद बेटे के हत्यारे को खोजने का फैसला किया। उन्होंने उस सड़क पर बार-बार जाकर जांच की, जहां हादसा हुआ था। आसपास के लोगों से बात की, सीसीटीवी और वाहनों की जानकारी जुटाने की कोशिश की। इसी दौरान उन्हें डंपर के नंबर का आधा हिस्सा पता चला। अधूरे नंबर के आधार पर वह आरटीओ कार्यालय पहुंचीं और लगातार प्रयासों के बाद पूरे वाहन नंबर तक पहुंच गईं।

उन्होंने जुटाए गए सभी साक्ष्य पुलिस को सौंपे। इसी बीच कोर्ट में दाखिल अंतिम रिपोर्ट पर सुनवाई हुई और अदालत ने उसे खारिज कर दिया। इसके बाद एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल के निर्देश पर मामले की दोबारा जांच शुरू हुई। प्रेमनगर क्षेत्र के सीओ की निगरानी में विशेष टीम बनाई गई, जिसने ललिता चौधरी द्वारा दिए गए साक्ष्यों और नए तथ्यों की गहराई से जांच की।

जांच में सामने आया कि हादसे के पीछे आरोपी चालक दल बहादुर था, जो विकासनगर के बाढ़वाला क्षेत्र का रहने वाला है। पुलिस ने मंगलवार रात आरोपी को प्रेमनगर क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। साथ ही घटना में इस्तेमाल डंपर को भी कब्जे में ले लिया गया है।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह साबित किया कि एक मां अपने बच्चे के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। जहां सिस्टम जवाब दे चुका था, वहां एक मां की हिम्मत और विश्वास ने न्याय का रास्ता बनाया। ललिता चौधरी की यह लड़ाई केवल उनके बेटे के लिए नहीं, बल्कि उन सभी परिवारों के लिए मिसाल है, जो न्याय की उम्मीद में संघर्ष कर रहे हैं।

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Hill Mail

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