कोरोना काल में ऑनलाइन कैसे पढ़ें गांव के बच्चे? 4 किमी चढ़ाई करें, तब फोन में आता है नेटवर्क

कोरोना काल में ऑनलाइन कैसे पढ़ें गांव के बच्चे? 4 किमी चढ़ाई करें, तब फोन में आता है नेटवर्क

विशेषज्ञों की मानें तो कोरोना का पीक आने में अभी समय है। एक विशेषज्ञ ने तो नवंबर में पीक आने की बात कही है। ऐसे में पहाड़ के गांवों के बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है क्योंकि उनके यहां कनेक्टिविटी ही नहीं है।

कोरोना काल में लोगों के कामकाज तो फिर से शुरू हो रहे हैं या हो गए हैं लेकिन बच्चों की पढ़ाई काफी प्रभावित हुई है। शहर के बच्चे तो ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं लेकिन उत्तराखंड के पहाड़ों पर बसे गांवों में रहने वाले बच्चे इस सुविधा से दूर हैं। चमोली जनपद का एक दूरस्थ गांव है इराणी। गांव के प्रधान मोहन सिंह नेगी बताते हैं कि यहां कनेक्टिविटी बिल्कुल जीरो है। 160 परिवार और करीब 1500 लोगों की आबादी यहां रहती है लेकिन फोन पर बात करनी हो तो 4 किमी ऊपर पहाड़ की ऊंचाई पर जाना पड़ता है।

पहाड़ पर ऊपर गए बगैर बीएसएनएल का सिग्नल नहीं मिल पाता है। ऐसे में बच्चों के लिए ऑनलाइन शिक्षा तो दूर की कौड़ी है। हालांकि प्रधान मोहन सिंह नेगी ने अपने स्तर पर एक छोटी सी पहल की। उन्होंने बताया कि बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्होंने अध्यापकों से मदद मांगी कि क्या वे टेलीफोन के जरिए बच्चों की समस्याएं दूर कर सकते हैं।

…तो क्या वाकई पतंजलि ने बना ली कोरोना की दवा?

तय हुआ कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बच्चों को चार किमी ऊपर ऊंचाई पर ले जाया जाएगा और फिर वहां से अध्यापकों से बात कराई जाएगी। इसके लिए गांव के लोगों से 9-10 मोबाइल इकट्ठा किए गए और फिर बच्चों को ले जाया जाने लगा। मैथ, साइंस और अन्य अध्यापकों से बच्चों के समस्याएं दूर करने के लिए फोन पर पढ़ाई का यह क्रम शुरू हुआ।

गांव के प्रधान मोहन सिंह कहते हैं कि नेटवर्क अच्छा होता तो वीडियो कॉल हो जाती लेकिन यहां तो 2जी भी ठीक से काम नहीं करता है। हवा चल जाए तो बात भी नहीं हो पाती है। प्रधान ने बताया कि अब जियो के रीजनल डायरेक्टर ने हमसे संपर्क किया है और एक टावर लगाने की बात कही है। वह कहते हैं कि कोरोना अचानक खत्म होने वाला नहीं है और ऐसे में छोटे बच्चों की पढ़ाई को लेकर सरकार को विशेष ध्यान देना होगा।

उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी की समस्या और भी कई गांवों में है। ग्राम प्रधान ने सरकार से मांग की है कि शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक गांव तक पहुंचाई जानी चाहिए क्योंकि पलायन का मुख्य कारण यही है। आपको बता दें कि कोरोना फैलने के बाद उत्तराखंड में करीब 2 लाख लोग देश के कोने-कोने से अपने घरों पर लौट आए हैं।

यह समस्या एक गांव की नहीं है। निजमुला घाटी के दूरस्थ गांव इराणी, पाणा, झींझी, दुर्मी, गौणा, धारकुमाला, निजमुला, सैंजी, ब्यारा तथा गाड़ी हैं, जहां नेटवर्क की दिक्कत है। इराणी में जियो का टावर स्थापित करने पर बात चल रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही लोगों को नेटवर्क की समस्या से निजात मिलेगी।

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