सी एम पपनैं
आयोजित सार्थक गोष्ठी में उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों के गांव घरों व सरकारी दफ्तरों में आदमखोर गुलदारों के बढ़ते भय व आतंक तथा लोगों को गुलदारों द्वारा निरंतर बडी संख्या में निवाला बनाए जाने पर चिंता व्यक्त की गई। घट रही घटनाआें पर कैसे अंकुश लगाया जा सकता है, उक्त ज्वलंत समस्या पर, उपस्थित प्रबुद्ध जनों द्वारा गहन विचार विमर्श व मंथन किया गया तथा भविष्य की रणनीति तय की गई।
प्रबुद्ध प्रवासी चिंतकों द्वारा अंचल के ग्रामीण जनों से जुडे संवेदनशील मसले पर स्थापित सरकार व प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार के नीति नियोजन तथा निरंतर उदासीन बने रहने पर असंतोष व्यक्त किया गया। सरकार के खिलाफ अनु पंत बनाम स्टेट ऑफ उत्तराखंड की रिट पिटीशन संख्या पीआईएल-74-2022 तथा बारह सूत्री मांग के बावत अवगत कराया गया। कुछ महत्वपूर्ण व दूरगामी मुद्दों व सुझाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

उपस्थित प्रबुद्ध चिंतकों द्वारा आयोजित गोष्ठी में व्यक्त किया गया, जिमकार्बेट के आस-पास बडी संख्या में जो रिज़ॉर्ट निर्मित किए गए हैं, सैलानियों की उक्त क्षेत्र में निरंतर बढती संख्या व शोर-शराबे के कारण जंगली जानवरों की जीवन चर्या में निरंतर रात-दिन जो खलल पड़ रहा है, बडी संख्या में उक्त कारण से जिमकार्बेट से इन जानवरों, खासकर बाघ प्रजाति के जानवरां द्वारा बडी संख्या में अंचल के अन्य जंगलों व ग्रामीण क्षेत्रों को पलायन कर, पर्याप्त भोजन की उपलब्धता न होने के कारण गुलदारों व अन्य वन्य जानवरों द्वारा जो जनहानि की जा रही है, असहनीय हो गई है।
खूंखार जानवर ग्रामीण क्षेत्रों में घुस कर नरभक्षी व पशुभक्षी बन, अपने आहार की पूर्ति कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में गुलदारों, तैन्दुओं व बागों के भय से ग्रामीण जन शहरी इलाकों को पलायन करने को बाध्य हुए हैं, गांव खाली होने से ग्रामीणों के खेत-खलिहान बंजर होने से उक्त स्थानों में झाड़ियां पनप गई हैं, जो गुलदारों व अन्य जंगली जानवरों के आश्रय स्थल बन गए हैं।
प्रबुद्ध वक्ताओं द्वारा व्यक्त किया गया, ताज्जुब है, माइग्रेशन कमीशन में गुलदार के द्वारा अंचल में किए जा रहे कारनामों का जिक्र तक नहीं किया गया है। वक्ताओं द्वारा कहा गया, एसटीएफ का गठन हो, नर व पशुभक्षी गुलदारों की ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही मौजूदगी के बावत एसटीएफ को शिकायत कर अंकुश लगाया जाए, ग्रामीणों के हित में उचित कार्यवाही सुनिश्चित करवाई जाए। वक्ताओं द्वारा व्यक्त किया गया, उक्त सब कार्यो हेतु ग्रामीणों को जागरूक होना आवश्यक है।

जंगल में आग लगने पर ग्रामीणों की मदद का आहवान किया जाए। ग्रामीणों को जीवन यापन, पशु पालन व कुटीर उद्योगों हेतु, प्रशासन द्वारा लागू किए गए जंगल के जन विरोधी नियमों व एक्ट को ग्रामीणों के हित में शिथिल कर, ग्रामीणों को जंगल की सुरक्षा से जोडा जाए, जंगल आग से सुरक्षित रहेंगे तो खूंखार भूखे जंगली जानवरों का ग्रामीण क्षेत्रों में घुसने पर अंकुश लग सकेगा।
सरकार और प्रशासन अगर ग्रामीण जनमानस से जुडे संवेदनशील मुद्दों पर उदासीन बने रहती है तो, जनआंदोलनों व न्यायालयों में मजबूती से सरकार व प्रशासन को चुनौती देने की बात पर भी, प्रबुद्ध जनों के मध्य मंथन किया गया।
आयोजित गोष्ठी समापन से पूर्व उपस्थित सभी प्रबुद्धजनों को आयोजित गोष्ठी सहयोगी ’मोल्यार रिसोर्स फाउंडेशन’ द्वारा नववर्ष आगमन की खुशी मे दुर्गा सिंह भंडारी व सीमा भंडारी के कर कमलों स्मृति चिन्ह प्रदान कर, नववर्ष 2023 आगमन की शुभकामना दी गई। आयोजित सार्थक गोष्ठी का प्रभावशाली मंच संचालन नीरज बवाडी द्वारा बखूबी किया गया।


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