Friday , 4 September 2026
Home उत्तराखंड न्यूज़ 53वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भोटिया जनजाति पर केन्द्रित गैर-फीचर फिल्म पाताल-ती प्रदर्शित
उत्तराखंड न्यूज़ताज़ा ख़बरदेश-विदेश

53वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भोटिया जनजाति पर केन्द्रित गैर-फीचर फिल्म पाताल-ती प्रदर्शित

मुकुंद नारायण ने कहा कि पाताल-ती भोटिया जैसी स्वदेशी भाषाओं की चुनौतियों पर भी प्रकाश डालती है जो विभिन्न सामाजिक दबावों के कारण लुप्तप्राय और गायब होती जा रही है।

फिल्म पर आगे बात करते हुए, सह-निर्देशक संतोष सिंह ने कहा कि फिल्म भोटिया जनजातियों पर आधारित है। निदेशक ने कहा, “हमने पर्यावरण संबंधी बातचीत के लिए पानी का एक रूपक के रूप में उपयोग किया है।“ संतोष सिंह ने कहा कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को मौखिक रूप से सुनाई जाने वाली लोक-कथाएं बाल नायक को पवित्र जल की खोज के दौरान जीवन, मृत्यु और इसके अन्य संदर्भों को समझने में मदद करती हैं। उन्होंने लोक कथाओं को समाज का विचार-विमर्श बताते हुए उनकी महत्ता पर बल देते हुए कहा कि वे हमारी संस्कृति की जड़ों की जानकारी प्रदान करती हैं।

निर्माण प्रक्रिया के बारे में मुकुंद नारायण ने कहा, “हम स्वतंत्र निर्माताओं के लिए बजट की समस्या होने के बावजूद पाताल-ती के माध्यम से भोटिया जनजातियों की कहानी बताना चाहते थे। रेसुल पुकुट्टी सहित बॉलीवुड के कई लोगों ने पोस्ट प्रोडक्शन में हमारी मदद की। हम उन सभी के आभारी हैं।“

सह-निर्देशक संतोष सिंह भारतीय भाषाओं की फिल्मों के भविष्य पर बोलते हुए, यह भी कहा कि हम एक ऐसे युग में प्रवेश कर रहे हैं जहां ’क्षेत्रीय’ ’नया वैश्विक’ बन गया है। “आज भारत की क्षेत्रीय फिल्में दुनिया में छा रही हैं, चाहे वह कांतारा हो या वाग्रो या फ्रेम। क्षेत्रीय फिल्म अब नई वैश्विक फिल्म बन गई है क्योंकि लोग पात्रों से जुड़ पा रहे हैं।“

फिल्म के बारे में
निर्देशकः मुकुंद नारायण और संतोष सिंह
निर्माताः मुकुंद नारायण और संतोष सिंह
पटकथाः मुकुंद नारायण और संतोष सिंह
सिनेमेटोग्राफरः बिट्टू रावत
संपादकः पूजा पिल्लई, संयुक्ता काज़ा
कलाकारः आयुष रावत, कमला देवी कुंवर, दमयंती देवी, धन सिंह राणा, भगत सिंह बुरफल

सारांशः

तेरह वर्षीय फग्नू अपने दादा के बिना इस संसार की कल्पना नहीं कर सकता। फग्नू अपने दादा के बीमार होने के बाद अपनी दादी की चेतावनियों के बावजूद उस कथित ’पवित्र जल’, जिसके बारे में बताया जाता है कि यह मिथक और वास्तविकता के बीच एक हिमालयी भावना द्वारा संरक्षित स्थान पर मिलता है, की कठिन खोज में निकल पड़ता है।

निर्देशक और निर्माताः

मुकुंद नारायण और संतोष सिंह ऐसे कहानीकार हैं, जो सिनेमा को सबसे सुलभ माध्यम मानते हैं। वे ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं। उन्होंने फिल्म निर्माण में कोई औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त नहीं किया है। दोनों अपरिचित (जिसके बारे में जानकारी नहीं है) भारत में मिथकों के विभिन्न दृष्टिकोणों का पता लगाने के लिए व्याकुल हैं। पाताल-ती उनकी पहली फिल्म है।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

प्रेशर हॉर्न पर अब सख्ती, दूसरी बार पकड़े जाने पर ₹10 हजार चालान

उत्तराखंड में वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने और उनका अनावश्यक इस्तेमाल करने...