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एम्स ऋषिकेश विस्तार से उत्तराखंड के मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत, 20 प्रतिशत बेड होंगे आरक्षित

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के प्रस्तावित विस्तार से उत्तराखंड के लाखों मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले गंभीर मरीजों को अब इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। एम्स प्रशासन का कहना है कि विस्तार के बाद अस्पताल में उत्तराखंड के लोगों के लिए 20 प्रतिशत बेड आरक्षित किए जाएंगे और राज्य के मरीजों को उपचार में प्राथमिकता भी दी जाएगी।

वर्तमान में एम्स ऋषिकेश उत्तराखंड के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले मरीजों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र बना हुआ है। अस्पताल में आने वाले मरीजों में लगभग 50 प्रतिशत उत्तराखंड के और 50 प्रतिशत अन्य राज्यों के मरीज शामिल हैं। लगातार बढ़ती मरीजों की संख्या के कारण अस्पताल पर दबाव बढ़ रहा है और कई बार बेड की उपलब्धता चुनौती बन जाती है।

एम्स प्रशासन के अनुसार संस्थान के विस्तार के लिए लगभग 200 एकड़ अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता है। भूमि उपलब्ध होते ही विस्तार कार्य शुरू किया जाएगा, जिसके बाद अस्पताल की बेड क्षमता बढ़ाकर करीब 3000 तक पहुंचाई जाएगी। इससे अगले दस वर्षों तक मरीजों को बेड और अन्य चिकित्सा सुविधाओं के लिए परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

एम्स की निदेशक प्रोफेसर मीनू सिंह ने बताया कि वर्तमान में भूमि की कमी और मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण दबाव जरूर है, लेकिन गंभीर मरीजों को रेफर नहीं किया जाता। अस्पताल लगातार सभी गंभीर रोगियों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है। विस्तार के बाद सुविधाओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और राज्य के लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए एम्स की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। राज्य के कई जिलों में सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण गंभीर रोगियों को ऋषिकेश स्थित एम्स पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में अस्पताल के विस्तार से मरीजों को समय पर उपचार और ऑपरेशन की सुविधा मिल सकेगी।

एम्स ऋषिकेश द्वारा संचालित हेली इमरजेंसी मेडिकल सर्विस (हेम्स) भी दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। आंकड़ों के अनुसार 29 अक्टूबर 2024 से 17 मई 2025 तक हेम्स सेवा के माध्यम से 63 गंभीर मरीजों को उपचार के लिए एम्स पहुंचाया गया। इनमें 27 ट्रॉमा, 17 स्त्री एवं प्रसूति रोग, 17 हृदय और मेडिसिन तथा दो नवजात शिशुओं के मामले शामिल थे।

वहीं, केदारनाथ में ‘संजीवनी’ हेलीकॉप्टर सेवा बंद होने के बाद राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही हेली सेवा के माध्यम से 18 मई 2025 से 25 अप्रैल 2026 तक 81 मरीजों को एम्स पहुंचाया गया। इनमें 37 ट्रॉमा, 11 स्त्री एवं प्रसूति रोग, 27 मेडिसिन तथा छह बाल रोग के मामले शामिल रहे। इस सेवा का लाभ केवल उत्तराखंड के लोगों को मिल रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एम्स का विस्तार राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती देगा। बढ़ी हुई बेड क्षमता, आधुनिक चिकित्सा उपकरण, अतिरिक्त ऑपरेशन थिएटर और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता से मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा। साथ ही गंभीर रोगियों को अन्य राज्यों के अस्पतालों में रेफर करने की आवश्यकता भी कम होगी।

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच हमेशा एक चुनौती रही है। ऐसे में एम्स ऋषिकेश का विस्तार न केवल राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को सशक्त बनाएगा, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। विस्तार योजना पूरी होने के बाद एम्स प्रदेशवासियों के लिए और अधिक प्रभावी स्वास्थ्य केंद्र के रूप में उभरकर सामने आएगा।

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Hill Mail

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