Monday , 14 September 2026
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गुलदार के हमले से सहमा पौड़ी: स्कूल बंद, लेकिन समाधान अभी दूर

पौड़ी जिले में गुलदार के बढ़ते आतंक ने एक बार फिर राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में भटकोट गांव में चार साल के मासूम की दर्दनाक मौत के बाद पूरे क्षेत्र में भय का माहौल है।

घटना के बाद प्रशासन ने एहतियातन दस स्कूलों को बंद कर दिया, जिसमें इंटर कॉलेज से लेकर प्राथमिक विद्यालय तक शामिल हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या स्कूल बंद करना ही समाधान है?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग और राज्य सरकार समय रहते कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रहे हैं। लंबे समय से क्षेत्र में गुलदार की मौजूदगी की सूचना दी जा रही थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

वन विभाग ने घटना के बाद टीम तैनात करने और गश्त बढ़ाने की बात कही है, लेकिन यह कार्रवाई हादसे के बाद क्यों की गई, यह बड़ा सवाल है।

ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी गई है, जबकि जिम्मेदार विभाग केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं।

राज्य सरकार की ओर से भी अब तक कोई ठोस और स्थायी योजना सामने नहीं आई है, जिससे ऐसे हमलों को रोका जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति की जरूरत है, लेकिन इस दिशा में गंभीर प्रयास नजर नहीं आ रहे।

घटना के बाद जनप्रतिनिधियों ने दुख जताया और परिजनों को सांत्वना दी, लेकिन केवल संवेदना से समस्या का समाधान नहीं होगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे ऐसे हमले प्रशासन की नाकामी को उजागर कर रहे हैं। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए अभिभावकों में डर और गुस्सा दोनों है, जो किसी भी समय बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।

अब समय आ गया है कि राज्य सरकार और वन विभाग जिम्मेदारी तय करें और जवाबदेही के साथ ठोस कदम उठाएं। यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो ऐसे हादसे भविष्य में और बढ़ सकते हैं।

सरकार को चाहिए कि प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाए, वन्यजीव नियंत्रण के उपाय लागू करे और स्थानीय लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिलाए। वरना उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में डर का यह माहौल और गहरा होता जाएगा।

यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी है।

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Hill Mail

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