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टिहरी झील को वैश्विक पर्यटन केंद्र बनाने की तैयारी, चार नए भारी वाहन पुलों की डीपीआर पर शुरू हुआ काम

उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध टिहरी झील को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। झील क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने और प्रतापनगर क्षेत्र को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने के लिए चार नए भारी वाहन पुलों के निर्माण की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। इसके लिए लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियों से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और डिजाइन तैयार करने हेतु निविदाएं आमंत्रित की हैं।

टिहरी झील पहले से ही वाटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर गतिविधियों और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। अब सरकार की योजना इसे विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की है। इसी उद्देश्य से एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) के सहयोग से करीब 1200 करोड़ रुपये की व्यापक पर्यटन विकास योजना तैयार की गई है।

योजना के तहत कोटी कॉलोनी से डोबरा-चांठी तक प्रस्तावित रिंग रोड का निर्माण कार्य पहले से प्रगति पर है। इसके अलावा प्रतापनगर क्षेत्र को पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता से स्थापित करने के लिए डोबरा-चांठी से मदननेगी होते हुए खांड और पीपलडाली तक रिंग रोड के सर्वेक्षण का कार्य भी जारी है। पीपलडाली से कोटी तक एक अन्य रिंग रोड का भी प्रस्ताव तैयार किया गया है।

परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा टिहरी झील के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने वाले चार नए भारी वाहन पुलों का निर्माण है। प्रस्तावित पुलों में डोबरा-चांठी में 500 मीटर लंबा डबल लेन केबल-स्टे सस्पेंशन ब्रिज, पीपलडाली में 450 मीटर लंबा तीन लेन केबल-स्टे सस्पेंशन ब्रिज, कोटी कॉलोनी में 370 मीटर लंबा तीन लेन सस्पेंशन ब्रिज तथा हडगीखाला में 150 मीटर लंबा तीन लेन स्टील ट्रस ब्रिज शामिल हैं।

इन पुलों के निर्माण से झील के दोनों ओर बसे क्षेत्रों के बीच आवागमन आसान होगा। विशेष रूप से प्रतापनगर क्षेत्र, जो लंबे समय से बेहतर संपर्क व्यवस्था की मांग करता रहा है, उसे पर्यटन और आर्थिक विकास के नए अवसर प्राप्त होंगे। स्थानीय लोगों को भी शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार संबंधी सुविधाओं तक पहुंचने में काफी सहूलियत मिलेगी।

लोनिवि बौराड़ी के समन्वयक एवं सहायक अभियंता नवीन कौशिक के अनुसार, पिछली बार वित्त विभाग से अनुमति नहीं मिलने के कारण यह परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई थी, जिससे करीब डेढ़ वर्ष का विलंब हुआ। अब वित्त विभाग से डीपीआर तैयार करने की स्वीकृति मिल चुकी है और प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि केवल डीपीआर और डिजाइन तैयार करने पर ही लगभग 10 से 12 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है, जबकि पुलों के निर्माण की लागत 1200 करोड़ रुपये की मूल पर्यटन विकास योजना से अलग होगी।

पर्यटन अवसंरचना को मजबूत बनाने के लिए झील क्षेत्र में कई अन्य परियोजनाएं भी प्रस्तावित हैं। इनमें ग्राम उन्नयन योजना, डोबरा ईको पार्क का विकास, मंदिरों का सौंदर्यीकरण, रोपवे का नवीनीकरण, पर्यटन सूचना केंद्रों की स्थापना, योग एवं ध्यान केंद्रों का निर्माण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली, वनीकरण कार्यक्रम तथा सार्वजनिक परिवहन कनेक्टिविटी में सुधार जैसे कार्य शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद टिहरी झील क्षेत्र न केवल उत्तराखंड बल्कि देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो जाएगा। बेहतर सड़क और पुल संपर्क से पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

सरकार की यह महत्वाकांक्षी पहल टिहरी झील को एक आधुनिक, सुगम और पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यदि योजनाएं निर्धारित समय में पूरी होती हैं तो आने वाले वर्षों में टिहरी झील वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बनाने में सफल हो सकती है।

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Hill Mail

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