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राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने दून विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्र-छात्राओं को किया सम्मानित

राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु अपने दो दिन के दौरे के दौरान उत्तराखंड आई हुई थी उन्होंने आज पहले मसूरी में एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया और उसके बाद दून विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में शामिल हुई। यहां पर उन्होंने 36 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। समारोह में वर्ष 2021 के स्नातक, परास्नातक एवं पी.एच.डी के 669 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई। स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले 36 विद्यार्थियों में 24 छात्राएं शामिल थीं। जिन्होंने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की थीम ‘उभरती नारी शक्ति’ को चरितार्थ किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देवभूमि उत्तराखंड को नमन करते हुए कहा कि आज दून विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भाग लेकर उन्हें बहुत खुशी हो रही है। डिग्री और मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि इस दिन की स्मृति इन विद्यार्थियों के जीवन-यात्रा के सबसे यादगार अनुभव में से एक रहेगी। आज इन विद्यार्थियों का एक सपना साकार हो रहा है।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह विश्वविद्यालय शिक्षा के विभिन्न मानकों पर एक उत्कृष्ट संस्थान के रूप में अपनी पहचान बनाएगा। राष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति, उसके मानव संसाधन की गुणवत्ता पर निर्भर होती है। मानव संसाधन की गुणवत्ता, शिक्षा की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। आज का युवा, कल का भविष्य है, इस सूत्र वाक्य को अंगीकार करते हुए, दून विश्वविद्यालय को सिर्फ राज्य स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्तापरक मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में कार्यरत रहना है।

राष्ट्रपति ने कहा कि दून विश्वविद्यालय युवाओं को सक्षम बनाने हेतु उन्हें कौशल प्रदान करने के लिए कृतसंकल्प है। विश्वविद्यालय द्वारा पांच विदेशी भाषाओं और तीन स्थानीय भाषाओं का भी अध्ययन व अध्यापन कार्य किया जा रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा स्थानीय भाषाओं को प्रोत्साहित करना हमारी लोक संस्कृति की संरक्षण का सराहनीय प्रयास है। हमारी लोक भाषाएं हमारी संस्कृति की अमूर्त धरोहर हैं। विश्वविद्यालय ने वर्तमान सत्र से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू किया है। भारत को नॉलेज सुपर पावर बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में यह उपयोगी कदम है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि विश्वविद्यालय में ’सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी चेयर स्थापित की गई है, जो राज्य के विकास के लिए नीति-निर्माण और क्षमता विकास के लिए समर्पित है। डॉ. नित्यानंद हिमालयी शोध एवं अध्ययन केन्द्र भी स्थापित किया गया है, जिसमें राज्य के भौगोलिक, ईकोलॉजिकल, आर्थिक और सामाजिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों में शोध और अध्ययन को प्रोत्साहित किया जायेगा। उत्तराखंड में राष्ट्रीय स्तर के अनेक संस्थान भारतीय सैन्य अकादमी, भारतीय वन्य जीव संस्थान, लाल बहादुर शास्त्री अकादमी, वन अनुसंधान संस्थान, भारतीय पेट्रोलियम अनुसंधान संस्थान तथा गोविंद वल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय विद्यमान हैं जिनकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि दून विश्व विद्यालय भी इन संस्थानों की तरह ख्याति प्राप्त करेगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी बेटिया जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर रही हैं। इसका साक्षात उदाहरण आज के इस दीक्षांत समारोह में देखने को मिला 36 गोल्ड मेडल्स में से 24 मेडल छात्राओं को प्राप्त हुए हैं, जबकि सोलह शोधार्थियों में से आठ बेटियों को पीएचडी की डिग्री प्रदान की गई है। इससे यह सिद्ध होता है कि संस्थान में महिलाओं को शिक्षा के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं और उनको प्रोत्साहित करने के लिए संस्थान प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय में तकनीकी शिक्षा को विशेष रूप से बढ़ावा देने के लिए, तीन तकनीकी स्कूल- स्कूल ऑफ बायोलोजिकल साइंस, स्कूल ऑफ डिजाइन और स्कूल आफ एनवायरमेंट एंड नेचुरल रिसोर्सेज कार्य कर रहे हैं।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि आज एक सुखद अनुभूति रही है। आज दून विश्वविद्यालय में सर्वोच्च मातृशक्ति के रूप में माननीय राष्ट्रपति हम सभी को आशीर्वाद प्रदान करने हेतु उपस्थित हुई हैं। विश्वविद्यालय ने पूरे वर्ष के लिए ‘उभरती नारी शक्ति’ थीम को आत्मसात किया है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हमारे सामने है, आज विश्वविद्यालय की मीडिया एवं एन.सी.सी की टीम में बड़ी तादात में हमारी बेटियां भाग ले रही हैं। राज्यपाल ने डिग्री प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि आज का दिन इन विद्यार्थियों के लिए एक उत्सव का दिन है, लेकिन आज का दिन मनन का भी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी के संघर्षमय जीवन का फलक अत्यंत व्यापक रहा है। उनकी प्रगतिशील चेतना ही थी जिसने इन भीषण संघर्षों की ज्वाला में तपाकर उनको विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत की राष्ट्रपति होने का गरिमामय आसन प्रदान किया। राष्ट्रपति का जीवन संघर्ष के साथ साथ महिला सशक्तिकरण की भी प्रेरणादाई मिसाल है। उनका सरल स्वभाव, धैर्यशीलता एवं विनम्र आचरण सभी के लिए अनुकरणीय उदाहरण है। देवभूमि उत्तराखंड सच्चे अर्थों में वसुधैव कुटुम्बकम की समृद्ध विचारधारा का पुण्य स्त्रोत है, जहां से “चिपको“ जैसा जनआंदोलन प्रारंभ हुआ जिसने प्रकृति की महत्ता को विश्व पटल पर पुनः रेखांकित किया और विश्व को गौरा देवी जी जैसी जुझारू महिला के व्यक्तित्व से परिचित होने का मौका दिया।

दून विश्वविद्यालय के लिये नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसलिये भी प्रासंगिक हो जाती है क्योंकि दून विश्वविद्यालय उत्तराखंड का एकमात्र विश्वविद्यालय है जहां विदेशी भाषाओं जैसे जापानी, फ्रेंच, जर्मन, चीनी तथा स्पेनिश में ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट एवं पीएचडी कोर्स संचालित किये जा रहे हैं, जिससे छात्रों को न केवल अंतराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों की भाषा एवं संस्कृति को समझने में मदद मिल रही है बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

इस अवसर पर वैज्ञानिक, पद्मविभूषण डॉ के. कस्तूरीरंगन, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल, सुबोध उनियाल, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, विधायकगण, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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Hill Mail

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