उत्तराखंड की प्रतिभा का आज पूरी दुनिया बखान कर रही है। संयुक्त राष्ट्र ‘वर्ल्ड ओसन डे’ ऑर्गेनाइजेशन ने विश्व स्तर पर समुद्र बचाओ प्रदर्शनी का आयोजन किया था, जिसमें दुनियाभर के कलाकारों ने अपना हुनर दिखाया। देवभूमि के प्रसिद्ध युवा चित्रकार राजेश चंद्र और उनके 2 बाल कलाकार शिवांश व मानव थापा की पेंटिंग्स ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसका संदेश बिल्कुल स्पष्ट और सटीक है। राजेश 24, शिवांश 11 और मानव महज 7 वर्ष के हैं। ‘हिल मेल’ से विशेष बातचीत में राजेश ने बताया कि वह ऋषिकेश में रहते हैं और मूल रूप से टिहरी गढ़वाल के बंदासा गांव के हैं।

उन्होंने बताया कि वह बचपन से ही पेंटिंग कर रहे हैं। उनकी मौसी भी पेटिंग करती है, तो उनसे काफी कुछ सीखा। स्कूल में पेटिंग को देख क्लास टीचर ने सुझाव दिया था कि मैं फाइन आर्ट्स में अपना करियर बनाऊं। अभी जो मेरी पेंटिंग आई है वह यूनाइटेड नेशन वर्ल्ड ओसन डे पर प्रकाशित हुई है।
उन्होंने कहा कि 8 जून को वर्ल्ड ओसन डे मनाया जाता है लेकिन इस बार कोरोना की वजह से वर्चुअल मनाया गया। मैंने और मेरे कुछ स्टूडेंट ने अपनी पेंटिंग भेजी थी। वहां हमारी तीन पेंटिंग लगी हैं और भारत से तीन पेंटिंग ही सिलेक्ट हुई हैं। कलरफुल केज टाइटल नाम से बनाई गई पिक्चर में राजेश ने दिखाया है कि कैसे एक कछुआ समुद्र के बीच कबाड़ में फंसा है और कछुआ एक सिंबल है, सभी जीव जंतु कैसे समुद्र में प्रदूषण की मार झेल रहे हैं। यह हम सभी के लिए प्राउड की बात है कि उत्तराखंड के तीन लोगों की पेंटिंग को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली और उसे दिखाया जा रहा है।
यहां क्लिक कर देखें संयुक्त राष्ट्र की साइट पर तीनों उत्तराखंडियों की पेंटिंग
राजेश की पेंटिंग “कूड़े का रंगीन पिंजरा” शिवांश की पेंटिंग” प्लास्टिक जानलेवा है” और मानव की पेंटिंग “समुद्र को साफ रखो” तीनों पेंटिंग के माध्यम से प्लास्टिक से होने वाले नुकसान को दिखाया गया है।


कैलिफोर्निया में भी छाई राजेश की पेंटिंग

इतना ही नहीं, राजेश चंद्र ने कैलिफोर्निया स्थित पर्यावरण संरक्षण ऑर्गेनाइजेशन हेयर्स टू अवर ओसन द्वारा आयोजित कला प्रतियोगिता में भी अपना जलवा दिखाया। इसमें दुनियाभर के प्रतिभागियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। राजेश ने बताया कि उन्होंने अपने चित्र हर दिन भूमि दिवस से कुछ उपाय बताए कि इससे हम प्लास्टिक के बने डिस्पोजल ग्लास, कोल्ड ड्रिंक स्ट्रॉ, डिस्पोजल आइसक्रीम कप की जगह इको फ्रेंडली तरीके से पर्यावरण को बचा सकते हैं। उन्होंने पेंटिंग में दिखाया कि एक बुजुर्ग नारियल पानी को धान के बने स्ट्रॉ से पी रहा है वहीं एक छोटा बच्चा उस खाली नारियल को एक पौधा लगाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है।





Leave a comment