राजेश चंद्र केवल एक कुशल शिक्षक ही नहीं, बल्कि एक प्रतिष्ठित कलाकार भी हैं। उनकी बनाई गई कई उत्कृष्ट पेंटिंग्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराही जा चुकी हैं और संयुक्त राष्ट्र (UN) में भी प्रदर्शित हो चुकी हैं। शिक्षा और कला के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के बाद अब उन्होंने एनसीसी के माध्यम से देशसेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
उन्होंने बताया कि नागपुर स्थित एनसीसी ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में आयोजित यह प्रशिक्षण अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को शारीरिक क्षमता, अनुशासन, नेतृत्व कौशल, हथियार संचालन, फायरिंग, ड्रिल, सैन्य रणनीति और आपात परिस्थितियों से निपटने जैसे विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षित किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यालयों में एनसीसी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए शिक्षकों को तैयार करना होता है, ताकि वे विद्यार्थियों को अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा के मूल्यों से जोड़ सकें।
राजेश चंद्र ने बताया कि इस प्रशिक्षण में देशभर से लगभग 560 कैडेट्स ने हिस्सा लिया था। उत्तराखंड डायरेक्टरेट का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने पूरे समर्पण और आत्मविश्वास के साथ सभी चरणों को सफलतापूर्वक पूरा किया। कठिन शारीरिक अभ्यास, फायरिंग और नेतृत्व संबंधी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद उन्हें सेकंड ऑफिसर का रैंक प्रदान किया गया।
प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद आयोजित पासिंग आउट परेड अकादमी का सबसे भावुक और गौरवपूर्ण क्षण रहा। इस अवसर पर अकादमी के कमांडेंट ने सभी प्रशिक्षुओं के अनुशासन, समर्पण और उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य में भी पूरी निष्ठा के साथ कार्य करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि एनसीसी अधिकारी केवल प्रशिक्षण देने वाले शिक्षक नहीं होते, बल्कि वे देश के युवाओं को राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और नेतृत्व की भावना से प्रेरित करने वाले मार्गदर्शक भी होते हैं।
पीपिंग सेरेमनी के दौरान जब राजेश चंद्र के कंधों पर दो सितारे लगाए गए तो पूरा वातावरण तालियों की गूंज से भर उठा। इस भावुक और गौरवपूर्ण पल में उनके मामा श्री सूर्य प्रकाश और भाई श्री योगेश चंद्र भी विशेष रूप से मौजूद रहे। परिवार के सदस्यों ने उन्हें बधाई देते हुए उनकी इस सफलता को वर्षों की मेहनत और लगन का परिणाम बताया।
राजेश चंद्र की यह उपलब्धि उत्तराखंड के युवाओं और शिक्षकों के लिए भी प्रेरणादायी मानी जा रही है। शिक्षा, कला और अब सैन्य नेतृत्व से जुड़े इस सफर ने यह साबित कर दिया है कि यदि दृढ़ संकल्प और समर्पण हो तो व्यक्ति एक साथ कई क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल कर सकता है। उनकी सफलता से प्रदेश के शिक्षकों और विद्यार्थियों में भी उत्साह का संचार हुआ है तथा उम्मीद जताई जा रही है कि उनके मार्गदर्शन में अधिक से अधिक युवा एनसीसी से जुड़कर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएंगे।


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