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‘राष्ट्रपुत्र’ : शिलांग में नेताजी की प्रेरणादायक विरासत का किया गया मंचन

वर्ष 2022 में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती, 23 जनवरी, को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसी श्रद्धांजलि के क्रम में, कर्तव्य पथ, इंडिया गेट पर नेताजी की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है, जो उनके अदम्य साहस और भारत की स्वतंत्रता के प्रति उनके अटल समर्पण का प्रतीक है।

भारत की आज़ादी में नेताजी के अतुलनीय योगदान को सम्मान देने हेतु, नेताजी इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल डेवलपमेंट (NSID) द्वारा ‘राष्ट्रपुत्र’ नाटक का निर्माण और मंचन किया गया। यह नाटक नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन और उनकी विरासत को चित्रित करता है। इसका लेखन और पटकथा अभय कश्यप, निदेशक, राष्ट्रीय जागृति संस्थान द्वारा की गई है। इससे पहले यह नाटक इंडिया इंटरनेशनल सेंटर और इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर, नई दिल्ली में मंचित हो चुका है।

NSID ने देश के महानायकों के जीवन पर आधारित नाटकों की श्रृंखला प्रस्तुत करने के लिए एक शौकिया थिएटर समूह का गठन किया है। ‘राष्ट्रपुत्र’ के बाद यह समूह अगला नाटक ‘सन राइज़ेज फ्रॉम द ईस्ट’ नामक प्रस्तुति पर कार्य कर रहा है, जो महान नेता पुर्नो ए. संगमा के जीवन पर आधारित है और जिसका मंचन 1 सितंबर 2026 को प्रस्तावित है।

स्वतंत्रता दिवस 2025 के उपलक्ष्य में, ‘राष्ट्रपुत्र’ का मंचन 14 अगस्त 2025 को शिलांग के राय ऑडिटोरियम, मुख्यालय, डीजीएआर, लैतकोर में प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक किया गया। इस आयोजन का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा, महानिदेशक, असम राइफल्स द्वारा किया गया, और इसका प्रायोजन पी.ए. संगमा फाउंडेशन एवं राष्ट्रीय जागृति संस्थान द्वारा किया गया। इस अवसर के मुख्य अतिथि मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा रहे। असम राइफल्स के जवानों और उनके परिवारों के लिए एक विशेष सायंकालीन प्रस्तुति भी आयोजित की गई।

नेताजी के आदर्श आज भी राष्ट्र के लिए मार्गदर्शक प्रकाश स्तंभ हैं। उन्होंने ही महात्मा गांधी को ‘राष्ट्रपिता’ की उपाधि दी थी। ऐसे में उन्हें ‘राष्ट्रपुत्र’ — राष्ट्र का सपूत — कहना पूर्णतः उपयुक्त है। उनका जीवन साहस, त्याग, धर्मनिरपेक्षता और देशभक्ति की मिसाल है।

आज जब नेताजी की प्रतिमा कर्तव्य पथ पर शाश्वत प्रहरी बनकर खड़ी है, वह हर भारतीय, विशेषकर युवाओं को इस स्वतंत्रता की रक्षा करने का आह्वान करती है, जिसे पाने के लिए उन्होंने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

‘राष्ट्रपुत्र’ नाटक के माध्यम से, हम आने वाली पीढ़ी को नेताजी के पदचिह्नों पर चलने और उसी अडिग भावना के साथ देश सेवा के लिए प्रेरित करने का प्रयास कर रहे हैं।

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Hill Mail

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