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सत्यनारायण मंदिर चारधाम यात्रा का प्रारम्भिक पड़ाव, जो 500 वर्ष है पुराना

चारधाम यात्रा 25 अप्रैल से शुरू होने वाली है ऐसे में पौराणिक श्री सत्यनारायण मंदिर जो कि ऋषिकेश में पिछले 500 वर्ष से भी अधिक समय से स्थापित है उसकी पौराणिक मान्यता के बारे में आपको बताते हैं। दरअसल इस मंदिर की मान्यता मनोकामना पूर्ण होने से लेकर देव भूमि के चारधामों से पौराणिक कालों से जुड़ी है।

उत्तराखंड की देव भूमि प्राचीन काल से ही ऋषि मुनियों की तपस्थली रही है, यहां बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे धाम मौजूद हैं, जिनकी ख्याति पूरे विश्व में फैली हुई है, इन्ही के समान महत्व रखने वाला ऋषिकेश का एक मंदिर है जो कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र भी है। ऋषिकेश से महज 6 किलोमीटर पूर्व स्थित प्राचीन सत्यनारायण मंदिर के बारे में जो कि चारधाम यात्रा का प्रारम्भिक पड़ाव भी है। यही से श्रद्धालु चारधाम यात्रा का शुभारम्भ करते हैं।

चारधाम यात्रा अब 25 अप्रैल से शुरू होने वाली है ऐसे मे पौराणिक श्री सत्यनारायण मंदिर जो कि ऋषिकेश में पिछले 500 वर्ष से भी अधिक समय से स्थापित उसकी पौराणिक मान्यता के बारे में आपको बताते हैं। दरअसल इस मंदिर की मान्यता मनोकामना पूर्ण होने से लेकर देव भूमि के चारधामों से पौराणिक कालों से जुड़ी है।

यह दिल्ली नेशनल हाइवे ऋषिकेश-रायवाला के मध्यस्थ स्थापित पौराणिक सत्यनारायण मंदिर 500 से अधिक वर्षो से सौंग नदी के तट पर स्थापित है। इसकी ख़ास बात यह है कि देवभूमि उत्तराखंड में यह पहली चट्टी के रूप में जानी जाती है। चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु अपनी यात्रा को इसी मंदिर से प्रारम्भ करते हैं। इस मंदिर की पौराणिक मान्यता यह भी है कि यहां आने वाले हर व्यक्ति की मनोकामना भी पूरी होती है, यही कारण है कि इस मंदिर में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगातार बना रहता है।

मंदिर में रहने वाले आचार्य बताते हैं कि चारोधामों की यात्रा की शुरआत करने से पहले तीर्थयात्री मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं यही कारण है कि उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की पहली चट्टी के रूप में सत्यनारायण भगवान के मंदिर को जाना जाता है। बताया कि सौंग नदी के तट पर बने सत्यनारायण मंदिर परिसर में गरुड़ भगवान का भी अपना स्थान है।

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