उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व कैबिनेट मंत्री और तीन बार विधायक रहे हीरा सिंह बिष्ट का शनिवार देर रात हार्ट अटैक से निधन हो गया। वह 85 वर्ष के थे। उनके निधन से प्रदेश की राजनीति, श्रमिक आंदोलन और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। रविवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके अंतिम दर्शन के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, पूर्व जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में समर्थक पहुंचे।
जानकारी के अनुसार, शनिवार देर रात करीब एक बजे हीरा सिंह बिष्ट को अचानक हृदयाघात आया। उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर फैलते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई। सुबह से ही उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए लोगों का तांता लगा रहा।
रविवार को उनकी अंतिम यात्रा देहरादून स्थित डीएल रोड के सेवक आश्रम रोड स्थित आवास से निकाली गई। अंतिम यात्रा में कांग्रेस नेताओं, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, श्रमिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। नालापानी श्मशान घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान पुलिस ने उन्हें औपचारिक सलामी दी और सभी ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनके आवास पहुंचकर पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित किया और शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हीरा सिंह बिष्ट का सार्वजनिक जीवन समाज सेवा, जनहित और श्रमिकों के अधिकारों के लिए समर्पित रहा। उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
हीरा सिंह बिष्ट उत्तराखंड की राजनीति का एक सम्मानित और प्रभावशाली चेहरा थे। उन्होंने लंबे समय तक कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। विधायक और मंत्री के रूप में उन्होंने विकास कार्यों को गति देने का प्रयास किया। वे श्रमिक हितों के प्रबल समर्थक रहे और लंबे समय तक भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) से जुड़े रहकर मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे।
अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने सादगी, ईमानदारी और जनसंपर्क को सबसे अधिक महत्व दिया। यही कारण रहा कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर आम जनता तक के बीच बेहद लोकप्रिय थे। सार्वजनिक जीवन में उनका व्यवहार सौम्य और मिलनसार माना जाता था। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद विभिन्न दलों के नेताओं के साथ उनके आत्मीय संबंध रहे।
उनके निधन पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मुख्यमंत्रियों, विधायकों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया। सभी ने उन्हें जननेता, कर्मठ राजनेता और श्रमिकों की मजबूत आवाज बताते हुए कहा कि उनके जाने से उत्तराखंड की राजनीति को अपूरणीय क्षति हुई है। कई सामाजिक और श्रमिक संगठनों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया।
हीरा सिंह बिष्ट का राजनीतिक और सामाजिक जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, श्रमिकों के अधिकारों के लिए उनका संघर्ष और समाज के प्रति उनकी निष्ठा को लंबे समय तक याद किया जाएगा। उनके निधन से उत्तराखंड ने एक ऐसे जननेता को खो दिया है, जिसने अपना पूरा जीवन जनता और समाज की सेवा के लिए समर्पित कर दिया।








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