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पिथौरागढ़ में खुदाई के दौरान मिली अद्भुत गुफा, सफेद शिवलिंग पर टपकती धारा बनी चर्चा का केंद्र

अल्मोड़ा के पुरातत्वविद चंद्र सिंह चौहान ने बताया कि यह एक प्राकृतिक गुफा है और इस तरह की गुफा के भीतर जो भी आकृतियां बनी होती हैं वह चूने की होती हैं। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर यह गुफा है वह स्थान यातायात से जुड़ा हुआ है। ऐसे में पर्यटन की दृष्टि से यह बेहद लाभकारी हो सकता है।

पिथौरागढ़ के कनालीछीना विकासखंड के खनपर गांव में मंदिर के सौंदर्यीकरण के दौरान की जा रही खुदाई में एक अलौकिक गुफा मिली है। इस गुफा के अंदर सफेद शिवलिंग है, जिस पर जलधारा भी टपक रही है। पुरातत्व विभाग के मुताबिक, यह 15 मीटर लंबी और 10 मीटर चौड़ी गुफा है। दूरदराज से लोग यहां इस गुफा को देखने पहुंच रहे हैं।

 

दरअसल, कनालीछीना विकासखंड में खनपर गांव के पास एक गुफा वाली माता के नाम से प्रसिद्ध मंदिर हैं। जहां पर इन दिनों मंदिर की धर्मशाला के सौंदर्यीकरण और आंगन का निर्माण किया जा रहा है। कुछ दिन पहले यहां चट्टानों की कटाई के दौरान पोकलैंड ऑपरेटर नीरज को पहाड़ी के अंदर छोटी सी गुफा दिखाई दी। निर्माण कार्य में लगे लोग गुफा के अंदर गए तो वहां उन्हें श्वेत शिवलिंग,और उसके ऊपर से टपकती जलधारा दिखाई दी। इस बारे में जानकारी मिलने पर गुफा देखने पहुंच रहे लोगों की भीड़ को देखते हुए फिलहाल वहां निर्माण कार्य रोक दिया गया है।

 

 

गुफा के प्रवेश द्वार के पास की ऊंचाई लगभग चार फीट और अंदर की ऊंचाई सात फीट है। यहां के स्थानीय निवासी हरीश तिवारी ने कहना है कि इस गुफा को पाताल भुवनेश्वर की तर्ज पर विकसित किया जा सकता है। उन्होंने पुरातत्व विभाग से इस गुफा का सर्वेक्षण कराने की मांग की है।

इस सबंध में हिल-मेल ने इस इलाके से आने वाले पुरातत्वविद चंद्र सिंह चौहान से बात की। उन्होंने बताया कि पिथौरागढ़ से बागेश्वर की बेल्ट में हजारों साल पुरानी चट्टानें हैं। उनके अंदर समय के साथ रासायनिक बदलाव आते हैं। यहां चट्टानों के अंदर चूने का पत्थर नई आकृतियां लेने लगता है। यह एक प्राकृतिक गुफा है और इस तरह की गुफा के भीतर जो भी आकृतियां बनी होती हैं, वे चूने की होती हैं। क्या अब चूना और नहीं रिसेगा, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि इन आकृतियों को जो आकार लेना था वो ये ले चुकी हैं। अब ये आकृतियां लंबे समय तक ऐसे ही रहने वाली हैं, इस लिहाज से इनमें ज्यादा बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर यह गुफा है वह स्थान यातायात से जुड़ा हुआ है। इस जगह की सड़क से दूरी भी महज आधा किलोमीटर ही है। ऐसे में पर्यटन की दृष्टि से यह बेहद लाभकारी हो सकता है। इसे पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जा सकता है।

इनपुट – रजनी मेहता, हल्द्वानी

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Hill Mail

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