गोपेश्वर के स्मिथ बिष्ट बने सेना में लेफ्टिनेंट, पहाड़ के युवाओं के लिए बने प्रेरणा

गोपेश्वर के स्मिथ बिष्ट बने सेना में लेफ्टिनेंट, पहाड़ के युवाओं के लिए बने प्रेरणा

चमोली जनपद के मुख्यालय गोपेश्वर के निवासी स्मिथ बिष्ट ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे उत्तराखंड का नाम रोशन किया है। बिहार के गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA), गया में आयोजित भव्य पासिंग आउट परेड के बाद उन्हें भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन मिला।

चमोली जनपद के मुख्यालय गोपेश्वर के निवासी स्मिथ बिष्ट ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे उत्तराखंड का नाम रोशन किया है। बिहार के गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA), गया में आयोजित भव्य पासिंग आउट परेड के बाद उन्हें भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन मिला। उन्हें प्रतिष्ठित 1 गोरखा राइफल्स में तैनाती दी गई है और वर्तमान में उनकी पलटन पंजाब के पठानकोट में तैनात है।

एक साधारण परिवार से निकलकर भारतीय सेना की वर्दी तक पहुंचने का स्मिथ बिष्ट का सफर कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प की प्रेरणादायक मिसाल है। पहाड़ के शांत वातावरण में पले-बढ़े स्मिथ ने बचपन से ही सेना में जाने का सपना देखा था और उसी लक्ष्य को सामने रखकर उन्होंने लगातार मेहनत की।

स्मिथ बिष्ट की प्रारंभिक शिक्षा केंद्रीय विद्यालय, गोपेश्वर से हुई। इसके बाद उन्होंने गुरु राम राय पब्लिक स्कूल से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई में हमेशा उत्कृष्ट रहे स्मिथ ने आगे ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से संगणक विज्ञान (कंप्यूटर साइंस) विषय में बीटेक की डिग्री प्राप्त की। तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ उनके मन में देशसेवा का जज़्बा भी उतना ही प्रबल था।

अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने भारतीय सेना में टेक्निकल एंट्री शॉर्ट सर्विस कमीशन के माध्यम से आवेदन किया और कठोर चयन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पार करते हुए सेना में अधिकारी बनने का सपना साकार किया। गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर कड़ी चुनौतियों का सामना किया और सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा कर पासिंग आउट परेड में भाग लिया।

स्मिथ बिष्ट के परिवार की पृष्ठभूमि भी शिक्षा से जुड़ी रही है। उनके पिता ललित मोहन बिष्ट जीजीआईसी गोपेश्वर में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता जया बिष्ट भी प्रधानाध्यापिका के रूप में शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रही हैं। परिवार में शिक्षा और अनुशासन का माहौल होने के कारण स्मिथ को बचपन से ही बेहतर मार्गदर्शन मिला।

अपनी इस उपलब्धि का श्रेय स्मिथ बिष्ट अपने माता-पिता, गुरुजनों और परिवार के सहयोग को देते हैं। उनका कहना है कि माता-पिता के संस्कार और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

स्मिथ बिष्ट की यह सफलता न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे चमोली और उत्तराखंड के लिए भी सम्मान की बात है। पहाड़ के सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत में ईमानदारी हो तो किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है।

आज स्मिथ बिष्ट पहाड़ के युवाओं के लिए एक प्रेरणा बनकर उभरे हैं। उनका यह सफर बताता है कि छोटे शहरों और गांवों से निकलकर भी युवा अपने सपनों को साकार कर सकते हैं और देशसेवा के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं। उनकी उपलब्धि निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ी को सेना में जाने और राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करेगी।

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