उत्तराखंड के सीमांत पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में स्थित प्रसिद्ध ओम पर्वत एक बार फिर अपने बदले स्वरूप को लेकर चर्चा में है। समुद्र तल से करीब 14 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित इस पवित्र पर्वत की चोटी पर इस मानसून में बर्फ की कमी साफ नजर आ रही है और पहाड़ का बड़ा हिस्सा काला दिखाई दे रहा है। बर्फ से प्राकृतिक रूप से बनने वाले ‘ॐ’ के अद्भुत आकार के लिए प्रसिद्ध इस पर्वत का बर्फविहीन नजर आना पर्यटकों और स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है।
ओम पर्वत पिथौरागढ़ की व्यास घाटी में स्थित है और आदि कैलाश यात्रा क्षेत्र से जुड़ा प्रमुख आकर्षण है। सामान्य परिस्थितियों में इसकी ऊंची चोटी पर जमी बर्फ एक विशिष्ट आकृति बनाती है, जिसे श्रद्धालु भगवान शिव से जुड़ा पवित्र ‘ॐ’ स्वरूप मानते हैं। इसी प्राकृतिक विशेषता के कारण यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन और साहसिक पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बन गया है।
लगातार बदल रहा हिमालयी स्वरूप
ओम पर्वत पर बर्फ का कम होना कोई पहली घटना नहीं है। वर्ष 2024 में भी पर्वत से पूरी तरह बर्फ गायब होने की घटना सामने आई थी। उस समय स्थानीय अधिकारियों और पर्वतारोहियों ने इसे असामान्य बताया था। रिपोर्टों के अनुसार, पांच वर्षों से ऊपरी हिमालयी क्षेत्र में बारिश और बर्फबारी के पैटर्न में बदलाव देखा गया है। वर्ष 2024 में बर्फ पूरी तरह गायब होने के बाद हुई बर्फबारी से कुछ समय बाद पर्वत पर फिर से सफेद चादर दिखाई दी थी।
अब 2026 के मानसून में एक बार फिर चोटी पर बर्फ का बेहद कम होना सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय स्तर पर इसे पिछले करीब एक दशक में तीसरी बार सामने आया असामान्य बदलाव बताया जा रहा है। हालांकि, इस विशेष ‘तीसरी बार’ के आंकड़े की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो पाई है, इसलिए इसे स्थानीय आकलन के रूप में देखा जाना चाहिए।
कम बर्फबारी और बढ़ते तापमान की चिंता
विशेषज्ञों ने पहले ओम पर्वत से बर्फ गायब होने की घटनाओं के पीछे कई संभावित कारण बताए हैं। इनमें ऊपरी हिमालय में कम बारिश, बर्फबारी का अनियमित होना, बढ़ता तापमान, वाहनों से होने वाला प्रदूषण और वैश्विक जलवायु परिवर्तन प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फ का समय से पहले पिघलना केवल किसी एक चोटी के स्वरूप में बदलाव तक सीमित नहीं है। इसका असर जल स्रोतों, हिमनदों, स्थानीय पारिस्थितिकी और पर्यटन पर भी पड़ सकता है। जनवरी 2026 में भी पिथौरागढ़ के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अपेक्षित बर्फबारी नहीं होने को लेकर चिंता सामने आई थी।
पर्यटन पर भी पड़ सकता है असर
ओम पर्वत धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। यहां आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक बर्फ से बने प्राकृतिक ‘ॐ’ स्वरूप को देखने के लिए उत्सुक रहते हैं। यदि लंबे समय तक पर्वत बर्फविहीन रहता है तो इसका असर क्षेत्र की पर्यटन गतिविधियों पर पड़ सकता है। वर्ष 2024 में भी अधिकारियों ने आशंका जताई थी कि लंबे समय तक बर्फ न रहने की स्थिति में पर्यटन प्रभावित हो सकता है।
ओम पर्वत की वर्तमान तस्वीर हिमालय में बदलते मौसम और घटते हिम आवरण की ओर एक गंभीर संकेत के रूप में देखी जा रही है। हालांकि किसी एक घटना को सीधे जलवायु परिवर्तन का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा, लेकिन लगातार दोहराए जा रहे ऐसे बदलावों की वैज्ञानिक निगरानी बेहद जरूरी है। हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी, तापमान और हिम आवरण के दीर्घकालिक आंकड़ों का अध्ययन ही इस बदलाव की वास्तविक वजह और उसके प्रभाव को स्पष्ट कर सकेगा।








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