देहरादून में आपदा तंत्र की एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में निर्णय लिया गया कि आपदा वाले क्षेत्रों में हाई टेक्नोलोजी का प्रयोग किया जाए जिससे कि होने वाली प्राकृतिक आपदा की जानकारी तुंरत मिल सके और वहां पर बचाव कार्य तुरंत आरम्भ किया जाये जिससे कि जान माल का नुकसान कम हो।
आपदा क्षमता विकास के अंतर्गत प्रबंधन तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने के प्रयास हो रहे है। इसके लिए सॉफ्टवेयर पर आधारित हाई टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जाएगा। आई.आर.एस., इंसिडेंट रिस्पांस सिस्टम को अधिक मजबूत बनाया जाएगा। इस संबंध में आज सचिवालय स्थित, डी.एम.एम.सी सभागार में विभिन्न स्टेक होल्डर से सुझाव लिया गया और उच्च तकनीक पर आधारित मॉडल का प्रेजेंटेशन किया गया। आपदा के समय प्रभावितों को मदद देर से मिल पाती है। उच्च तकनीक के मदद से रिस्पांस समय को बहुत कम किया जा सकता है। इसमें जी.आई.एस. और जी.पी.एस. के मदद से आपदा स्थल पर बहुत कम समय में अधिक मदद पहुंचाई जा सकती है। यदि किसी स्थान पर भूस्खलन, बाढ़ की स्थिति आती है जब जल्द से जल्द इसकी जानकारी हाईटेक सिस्टम पर दिखाई देने लगेगा। इसमें मोबाइल एप का भी सहारा लिया जाएगा।
इस बैठक में सचिव डॉ रंजीत कुमार सिन्हा, अपर सचिव डॉ आनन्द श्रीवास्तव, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी जितेन्द्र सोनकर, अधिशासी निदेशक डॉ पीयूष रौतेला उपस्थित थे। बैठक में वाडिया इंस्टीट्यूट दूरसंचार विभाग, एन.आई.सी ने अपने अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिये।


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