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हो सकता है मैदानी इलाके के लोगों को लकड़ी के पुल का महत्व न पता हो पर पहाड़ या नदी के आसपास रहने वाले लोग इसे बखूबी जानते हैं। परेशानी के साथ-साथ इससे दूरी भी कम हो जाती है। उत्तराखंड के चमोली जिले में पिछले दिनों पुल बह गया तो लोगों की परेशानी बढ़ गई।
READ MOREमैदानी इलाकों में कभी कोई परेशानी आए तो लोग फौरन अस्पताल पहुंच जाते हैं। 8-10 किमी दूर भी हो अस्पताल तो उन्हें पहुंचने में ज्यादा मुश्किल नहीं आती है। पर उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में सुदूर गांवों में अगर किसी को पेट दर्द भी उठता है तो उसे पैदल 10 किमी तक कंधे पर लेकर चलना पड़ता है।
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हो सकता है मैदानी इलाके के लोगों को लकड़ी के पुल का महत्व न पता हो पर पहाड़ या नदी के आसपास रहने वाले लोग इसे बखूबी जानते हैं। परेशानी के साथ-साथ इससे दूरी भी कम हो जाती है। उत्तराखंड के चमोली जिले में पिछले दिनों पुल बह गया तो लोगों की परेशानी बढ़ गई।
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मैदानी इलाकों में कभी कोई परेशानी आए तो लोग फौरन अस्पताल पहुंच जाते हैं। 8-10 किमी दूर भी हो अस्पताल तो उन्हें पहुंचने में ज्यादा मुश्किल नहीं आती है। पर उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में सुदूर गांवों में अगर किसी को पेट दर्द भी उठता है तो उसे पैदल 10 किमी तक कंधे पर लेकर चलना पड़ता है।
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