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अल्मोड़ा ज़िले के पिओरा क्षेत्र का एक छोटा-सा गांव है — डायरी। पहाड़ों की गोद में बसा यह गांव बाहर से जितना शांत दिखता है, इसके भीतर उतनी ही गहरी सांस्कृतिक धड़कन छुपी है। इसी गांव में रहते हैं ललित, जो आज भी लकड़ी पर हाथ से पारंपरिक उत्तराखंडी डिज़ाइन तराशते हैं। मशीनों और तेज़ उत्पादन के इस दौर में वे उन गिने-चुने कारीगरों में से हैं, जो इस दुर्लभ और बहुमूल्य कला को आज भी जीवित रखे हुए हैं।
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अल्मोड़ा ज़िले के पिओरा क्षेत्र का एक छोटा-सा गांव है — डायरी। पहाड़ों की गोद में बसा यह गांव बाहर से जितना शांत दिखता है, इसके भीतर उतनी ही गहरी सांस्कृतिक धड़कन छुपी है। इसी गांव में रहते हैं ललित, जो आज भी लकड़ी पर हाथ से पारंपरिक उत्तराखंडी डिज़ाइन तराशते हैं। मशीनों और तेज़ उत्पादन के इस दौर में वे उन गिने-चुने कारीगरों में से हैं, जो इस दुर्लभ और बहुमूल्य कला को आज भी जीवित रखे हुए हैं।
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