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ग्रामीण स्तर पर चलने वाले हेल्थ सेंटरों की स्थिति छिपी नहीं है। डॉक्टरों की अनिवार्य तैनाती की कमी साफ नजर आती है। महज फॉर्मासिस्ट के भरोसे ये सेंटर चल रहे हैं। निश्चित तौर पर दवाओं की उपलब्धता एक बड़ा कारण हैं। कोविड मेडिसिन का जो अधिकृत इलाज उत्तराखंड सरकार के स्वास्थ्य महानिदेशालय की ओर से बताया गया है, कई जगह उसकी दवाएं नहीं हैं। दुर्गम इलाकों में कोरोना किट तो पहुंची लेकिन उनमें थर्मामीटर, ऑक्सीमीटर और कई अहम एंटीबॉयोटिक्स नहीं थे।
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ग्रामीण स्तर पर चलने वाले हेल्थ सेंटरों की स्थिति छिपी नहीं है। डॉक्टरों की अनिवार्य तैनाती की कमी साफ नजर आती है। महज फॉर्मासिस्ट के भरोसे ये सेंटर चल रहे हैं। निश्चित तौर पर दवाओं की उपलब्धता एक बड़ा कारण हैं। कोविड मेडिसिन का जो अधिकृत इलाज उत्तराखंड सरकार के स्वास्थ्य महानिदेशालय की ओर से बताया गया है, कई जगह उसकी दवाएं नहीं हैं। दुर्गम इलाकों में कोरोना किट तो पहुंची लेकिन उनमें थर्मामीटर, ऑक्सीमीटर और कई अहम एंटीबॉयोटिक्स नहीं थे।
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