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कोरोना उत्तराखंड समेत पूरे देश में फैल रहा है लेकिन अब भी पहाड़ों में पहले से कायम सामाजिक दूरी के चलते संक्रमण कम है। अब कोरोना के बाद के हालात को लेकर योजनाएं भी उसी हिसाब से बनानी होंगी। प्रकृति के संरक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा। इसी दिशा में एक अनोखी पहल हुई है….
READ MOREजलवायु परिवर्तन और पेड़ों के कटने से हिमालय में पायी जाने वाली कई वनस्पतियां खतरे की जद में आ गई हैं। भोजपत्र के पेड़ भी इनमें शामिल हैं। यह हिमालयी वनस्पतियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। अस्सी के दशक में भोजपत्र के जंगल नाम मात्र को बचे थे। लेकिन आज स्थिति बदल गई है। गौमुख के रास्ते में भोजपत्रों का जंगल हराभरा है।
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कोरोना उत्तराखंड समेत पूरे देश में फैल रहा है लेकिन अब भी पहाड़ों में पहले से कायम सामाजिक दूरी के चलते संक्रमण कम है। अब कोरोना के बाद के हालात को लेकर योजनाएं भी उसी हिसाब से बनानी होंगी। प्रकृति के संरक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा। इसी दिशा में एक अनोखी पहल हुई है….
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जलवायु परिवर्तन और पेड़ों के कटने से हिमालय में पायी जाने वाली कई वनस्पतियां खतरे की जद में आ गई हैं। भोजपत्र के पेड़ भी इनमें शामिल हैं। यह हिमालयी वनस्पतियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। अस्सी के दशक में भोजपत्र के जंगल नाम मात्र को बचे थे। लेकिन आज स्थिति बदल गई है। गौमुख के रास्ते में भोजपत्रों का जंगल हराभरा है।
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