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पद्मभूषण से सम्मानित सुंदर लाल बहुगुणा को 8 मई को बुखार और खांसी की शिकायत के बाद ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने शुक्रवार दोपहर 12 बजे निधन हो गया। 94 वर्षीय बहुगुणा कोविड संकमित थे। चिपको आंदोलन के कारण उन्हें विश्वभर में वृक्षमित्र के नाम से प्रसिद्धि मिली। ।
READ MOREकुछ ऐसे लोग होते हैं, जो चर्चा में आने की चिंता किए बगैर अपने काम में अपनी ही धुन से लगे रहते हैं। ये कहानी है उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट के बालातड़ी गांव के दिव्यांग मोहन नागिला की। जिनके 15 साल की मेहनत की हरियाली कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है।
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पद्मभूषण से सम्मानित सुंदर लाल बहुगुणा को 8 मई को बुखार और खांसी की शिकायत के बाद ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने शुक्रवार दोपहर 12 बजे निधन हो गया। 94 वर्षीय बहुगुणा कोविड संकमित थे। चिपको आंदोलन के कारण उन्हें विश्वभर में वृक्षमित्र के नाम से प्रसिद्धि मिली। ।
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कुछ ऐसे लोग होते हैं, जो चर्चा में आने की चिंता किए बगैर अपने काम में अपनी ही धुन से लगे रहते हैं। ये कहानी है उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट के बालातड़ी गांव के दिव्यांग मोहन नागिला की। जिनके 15 साल की मेहनत की हरियाली कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है।
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