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रैणी में हुई आपदा में तपोवन टनल में सैकड़ो मजदूर हो गए थे दफ़न। 2021 में हुई आपदा के जख्म रह रह के हो रहे हरे। टनल में मिला एक शव।
READ MOREGuest Article by पद्मश्री कल्याण सिंह रावत, पर्यावरणविद् एवं मैती आंदोलन के प्रणेता I
गौरा देवी के चिपको आंदोलन में शामिल रही महिलाओं ने साल 2010 में ‘चिपको स्मृति यात्रा’ के दौरान एक धार में खड़े होकर ऋषिगंगा में बन रही जल विद्युत परियोजना को दिखाते हुए कहा था कि यह हमारे विनाश का कारण बनेगा। हमारे सारे पेड़ काट दिए गए हैं और हमारा गांव अंदर ही अंदर से खोखला हो गया है। गौरा देवी के साथ प्रमुख रूप से कार्य करने वाली तथा गौरा देवी की सहेली श्रीमती बटनी देवी ने कहा था कि हमने कितना समझा दिया है इनको, पर ये समझते ही नहीं। सरकार भी हमारी कुछ सुनती नहीं, हम क्या करें?
READ MOREरैणी गांव के पास ऋषिगंगा पर 90 मीटर लंबा बैली ब्रिज था, जो ऋषिगंगा में आई आपदा में ध्वस्त हो गया। उफान में पुल के साथ ही दोनों तरफ एबडमेंट और आसपास की जमीन भी बह गई। इसके बाद नई जगह पर ब्रिज बनाने पर सहमति बनी।
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रैणी में हुई आपदा में तपोवन टनल में सैकड़ो मजदूर हो गए थे दफ़न। 2021 में हुई आपदा के जख्म रह रह के हो रहे हरे। टनल में मिला एक शव।
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गौरा देवी के चिपको आंदोलन में शामिल रही महिलाओं ने साल 2010 में ‘चिपको स्मृति यात्रा’ के दौरान एक धार में खड़े होकर ऋषिगंगा में बन रही जल विद्युत परियोजना को दिखाते हुए कहा था कि यह हमारे विनाश का कारण बनेगा। हमारे सारे पेड़ काट दिए गए हैं और हमारा गांव अंदर ही अंदर से खोखला हो गया है। गौरा देवी के साथ प्रमुख रूप से कार्य करने वाली तथा गौरा देवी की सहेली श्रीमती बटनी देवी ने कहा था कि हमने कितना समझा दिया है इनको, पर ये समझते ही नहीं। सरकार भी हमारी कुछ सुनती नहीं, हम क्या करें?
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