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तीर्थ-पुरोहितों ने दो तर्क सामने रखे। पहला यह कि केदारनाथ धाम में पहले भी तीर्थ-पुरोहित ही कपाट खुलने की मुख्य पूजा करते रहे हैं। दूसरा यह कि कपाट खुलने की तिथि या लग्न बदलना शुभ नहीं होता।
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तीर्थ-पुरोहितों ने दो तर्क सामने रखे। पहला यह कि केदारनाथ धाम में पहले भी तीर्थ-पुरोहित ही कपाट खुलने की मुख्य पूजा करते रहे हैं। दूसरा यह कि कपाट खुलने की तिथि या लग्न बदलना शुभ नहीं होता।
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