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कभी-कभी बॉल वहीं गुम हो जाती। बॉल खोने पर उसे ढूंढने का हमारे पास दिव्य तरीका था । हम अपने उल्टे हाथ में थूकते थे फिर सीधे हाथ की दो उंगलियों से थूक में मारते और कहते-“आती-पाती म्यर बॉल कति” जिधर को थूक उड़ कर जाता उसी दिशा में बॉल को खोजते थे। हिल-मेल के साथ याद कीजिए अपने बचपन का सुनहरा दौर…।
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कभी-कभी बॉल वहीं गुम हो जाती। बॉल खोने पर उसे ढूंढने का हमारे पास दिव्य तरीका था । हम अपने उल्टे हाथ में थूकते थे फिर सीधे हाथ की दो उंगलियों से थूक में मारते और कहते-“आती-पाती म्यर बॉल कति” जिधर को थूक उड़ कर जाता उसी दिशा में बॉल को खोजते थे। हिल-मेल के साथ याद कीजिए अपने बचपन का सुनहरा दौर…।
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