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वेदांन्त बिष्ट ने उत्तराखंड से ही ड्रोन उड़ाने की तकनीक सीखी और अब रिलायंस समूह की हिस्सेदारी वाली देश की प्रतिष्ठित कंपनी एस्टीरिया एयरोस्पेस में डीजीसीए द्वारा सर्टिफाइड ड्रोन पायलट के तौर पर काम कर रहे हैं। उत्तराखंड में ड्रोन एप्लीकेशन सेंटर की स्थापना का पहला प्रस्ताव हिल-मेल के फ्लैगशिप कार्यक्रम ‘रैबार’ के साल 2017 में देहरादून में आयोजित पहले संस्करण में नेशनल टेक्नीकल रिसर्स आर्गेनाइजेशन (एनटीआरओ) के तत्कालीन प्रमुख आलोक जोशी ने रखा था।
READ MOREइस दौरान गढ़वाल विश्वविद्यालय के पर्यटन विभाग के पूर्व प्रमुख प्रो. एससी बागड़ी ने कहा कि पर्यटन संबंधी आंकड़ो का उचित सृजन करने, स्थानीय लोगों को बढ़ावा देने तथा उत्तराखंड में कम विकसित क्षेत्रों को अधिक प्रचारित किए जाने की आवश्यकता है। राज्य में स्थित पर्यटन संबंधी सभी मूलभूत सुविधाओं को श्रेणीबद्ध करना बेहद जरूरी है।
READ MOREहिमालयन नॉलेज नेटवर्क क्षेत्रीय, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताओं जैसे- गरीबी उन्मूलन, स्वस्थ समाज, सतत विकास, पर्यावरण सुरक्षा तथा जैव विविधता संरक्षण आदि कुल 17 क्षेत्रों के अनुरूप हिमालय क्षेत्र के संरक्षण की दिशा में काम कर रहा है।
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वेदांन्त बिष्ट ने उत्तराखंड से ही ड्रोन उड़ाने की तकनीक सीखी और अब रिलायंस समूह की हिस्सेदारी वाली देश की प्रतिष्ठित कंपनी एस्टीरिया एयरोस्पेस में डीजीसीए द्वारा सर्टिफाइड ड्रोन पायलट के तौर पर काम कर रहे हैं। उत्तराखंड में ड्रोन एप्लीकेशन सेंटर की स्थापना का पहला प्रस्ताव हिल-मेल के फ्लैगशिप कार्यक्रम ‘रैबार’ के साल 2017 में देहरादून में आयोजित पहले संस्करण में नेशनल टेक्नीकल रिसर्स आर्गेनाइजेशन (एनटीआरओ) के तत्कालीन प्रमुख आलोक जोशी ने रखा था।
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इस दौरान गढ़वाल विश्वविद्यालय के पर्यटन विभाग के पूर्व प्रमुख प्रो. एससी बागड़ी ने कहा कि पर्यटन संबंधी आंकड़ो का उचित सृजन करने, स्थानीय लोगों को बढ़ावा देने तथा उत्तराखंड में कम विकसित क्षेत्रों को अधिक प्रचारित किए जाने की आवश्यकता है। राज्य में स्थित पर्यटन संबंधी सभी मूलभूत सुविधाओं को श्रेणीबद्ध करना बेहद जरूरी है।
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