दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी है। हड़ताल के कारण मुकदमों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। अनिश्चितकालीन हड़ताल के दूसरे दिन भी हाईकोर्ट में काम काज ठप है।
प्रदेशभर से ऐसे फरियादी जिन्हें हड़ताल के बारे में जानकारी नहीं हो पाई थी वो लौट रहे हैं। बार एसोसिएशन के पदाधिकारी हाईकोर्ट के गेट नंबर 3 के बाहर टेंट लगाकर धरना दे रहे हैं और सभा कर रहे हैं। उधर, कैट बार एसोसिएशन ने भी हड़ताल शुरू कर दी है। वहां भी काम काज ठप हो गया है। बार के पदाधिकारी और अधिवक्ता मंच से भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं और ज्यूडीशरी में इसे कतई बर्दाश्त न करने की बात कह रहे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी मांग करप्शन फ्री न्यायपालिका की है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कमी है, इसका कतई यह मतलब नहीं है कि आप हमें कूड़ा करकट दे देंगे। जब तक जस्टिस यशवंत वर्मा को क्लीनचिट न मिल जाए उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट ही क्यों नहीं रहने दिया जाता। हमने ईडी और सीबीआई जांच की मांग की है। ये एजेंसियां अगर जस्टिस वर्मा को क्लीनचिट दे देती हैं तो उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया जाए। हमें कोई आपत्ति नहीं है। अगर बिना जांच के जस्टिस यशवंत वर्मा अगर इलाहाबाद हाईकोर्ट आएंगे तो उनका विरोध होगा। उनकी बेंच का बहिष्कार होगा।
सरकार को चाहिए कि वो जस्टिस यशवंत वर्मा का इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर रद कर दें। उन्हें किसी और स्टेट में भेज दें। बता दें कि सरकारी आवास से नकदी मिलने के बाद जांच का सामना कर रहे दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा से न्यायिक कार्य वापस लेने के साथ ही साथ उनको इलाहाबाद हाईकोर्ट (मूल न्यायालय) फिर से भेजने का आदेश दिया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम के फैसले के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी है। हड़ताल का आज दूसरा दिन है। बार एसोसिएशन ने बुलाई आपातकालीन आम सभा में 11 बिंदुओं पर प्रस्ताव पास किया था।
इसमें जस्टिस यशवंत वर्मा पर महाभियोग चलाए जाने, सीबीआई व ईडी जैसी जांच एजेंसियों से एफआईआर दर्ज कर जांच कराने जैसी मांगें शामिल हैं। उधर, सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय आंतरिक जांच समिति ने जस्टिस यशवंत वर्मा के घर में भारी मात्रा में नकदी मिलने की जांच शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना के निर्देश पर बनी समिति के सदस्यों में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शीलू नागू, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जीएस संधावालिया, कर्नाटक हाईकोर्ट के जज जस्टिस अनु शिवरामन मंगलवार को दिल्ली के 30 तुगलक क्रीसेंट स्थित जस्टिस वर्मा के घर पहुंचे। करीब 40 मिनट तक घर के अंदर जांच समिति ने समय बिताया।
जांच समिति उस स्टोर में भी गई जहां, 500-500 रुपए के अधजले नोट बोरियों में रखे मिले थे। जस्टिस वर्मा के घर 14 मार्च की रात आग लग गई थी, जिसके बाद अग्निशमन अधिकारियों ने नकदी मिलने का खुलासा किया था। इसके बाद जांच के लिए चीफ जस्टिस ने तीन सदस्य जांच समिति का गठन किया है। हालांकि जस्टिस यशवंत वर्मा ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि इस नकदी का उनके परिवार से कोई लेना-देना नहीं है। उनके परिवार का कोई भी सदस्य स्टोर रूम में कभी नहीं जाता और ना ही वह घर का हिस्सा है। नकदी कहां से आई उन्हें नहीं पता।


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