महिलाओं के विरूद्ध होने वाले बलात्कार, छेड़खानी एवं पोक्सो एक्ट के मामलों की जांच करने वाली महिला अधिकारियों को जांच एवं विवेचना में संवदेनशील करने हेतु पुलिस लाइन देहरादून में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। जिसका शुभारम्भ पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार (डीजीपी) ने किया।
देहरादून के रिजर्व पुलिस लाइन में पुलिस महानिदेशक ने दुष्कर्म, छेडखानी और पोक्सो एक्ट के मामलों की जांच करने वाली महिला पुलिस अधिकारियों के लिए एक कार्यशाला का आयोजन किया।
एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए डीजीपी ने कहा कि महिला सुरक्षा के प्रति उत्तराखंड पुलिस बेहद संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि निर्भया केस के बाद देश में महिला सुरक्षा संबंधी कानूनों में कई परिवर्तन हुए हैं और कई नए कानून भी बने हैं।
डीजीपी ने अधिकारियों को पीड़िताओं के साथ संवेदनशील व्यवहार करने, दुष्कर्म व पोक्सो के मामले में पीड़िता को किसी भी राज्य व जिले में एफआइआर दर्ज कराने की सुविधा देने, उन्हें थाने न बुलाकर खुद उनके पास जाकर बयान दर्ज करने और 24 घंटे के भीतर उनका चिकित्सकीय परीक्षण कराने की सीख दी।
इस कार्यशाला में भाग लेने के लिए राज्य से लगभग 300 महिला दारोगाओं को बुलाया गया था, जिसमें से 118 महिला दारोगा ही इसमें शामिल हुई। डीजीपी ने गढ़वाल व कुमाऊं क्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक से कम संख्या में महिला दरोगाओं के आने का कारण पूछा है। हालांकि कई महिला दारोगाओं की ड्यूटी होने के कारण वह इस कार्यशाला में भाग नहीं ले सकी।


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