इस बार के लोकसभा चुनावों में दिखेगा मोदी सरकार की विकास नीतियों का असर

इस बार के लोकसभा चुनावों में दिखेगा मोदी सरकार की विकास नीतियों का असर

उत्तराखंड में 19 अप्रैल को पांच लोकसभा सीटों पर एक साथ मतदान होना है। इस बार का चुनाव कई मायने में खास होने जा रहा है। हरिद्वार से लेकर आगे तक आज गंगा जल पीने योग्य हो गया है। धर्मनगरी हरिद्वार से बीजेपी के लोकसभा उम्मीदवार त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह दावा किया है। हरिद्वार में हिल मेल ने उनसे ख़ास बातचीत की।

उत्तराखंड में पहले चरण में लोकसभा का चुनाव होना है और चुनाव प्रचार में अब सिर्फ़ कुछ दिन बचे हैं ऐसे में चुनाव प्रचार चरम पर पहुंच गया है। हरिद्वार लोकसभा में मुस्लिम समुदाय के चार लाख से अधिक वोट हैं। लेकिन इस बार मुस्लिम समुदाय में मोदी सरकार की विकास की नीतियों के असर नज़र आ रहा है।

हिल मेल से बातचीत करते हुए त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों का उत्तराखंड में असर दिखता है। यह चुनाव बहुत अलग है क्योंकि इसे जनता लड़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों से प्रभावित होकर लोग आज भाजपा के पक्ष में खड़े हैं। उन्हें उम्मीद है की हरिद्वार लोकसभा सीट पर भाजपा पांच लाख के अंतर से चुनाव जीतेगी।

हिल मेल ने त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ दिनभर का चुनावी सफ़र तय किया। हम सुबह से लेकर शाम तक त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ मौजूद हैं। वह नाश्ते में बहुत सामान्य खाना खाते हैं, जो भी उपलब्ध हो वही खा लिया। उनका चुनाव तक सिर्फ़ एक ही मिशन है पांच लाख से अधिक वोटों से जीत हासिल करनी है। त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि हम सनातन धर्म के साथ हैं कुछ लोग सनातन धर्म पर सवाल उठाते हैं। महात्मा गांधी ने भी रामराज्य की कल्पना की थी उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरा कर रहे हैं।

त्रिवेंद्र सिंह रावत का जन्म 20 दिसंबर 1960 को उत्तराखंड के पौडी गढ़वाल जिले में कोटद्वार तहसील के खैरासैण गांव में हुआ था। वह परिवार में नौवें और सबसे छोटे थे। उनकी शिक्षा दीक्षा पहाड़ में ही हुई, उन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से संबद्ध श्रीनगर के बिड़ला परिसर से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री प्राप्त की।

हरिद्वार से बीजेपी के लोकसभा प्रत्याशी त्रिवेंद्र सिंह रावत का राजनीतिक सफर वर्ष 1979 में शुरू हुआ। इस वर्ष त्रिवेंद्र सिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। वर्ष 1981 में संघ के प्रचारक के रूप में काम करने का उन्होंने संकल्प लिया। वर्ष 1985 में देहरादून महानगर के प्रचारक बने। वर्ष 1993 में वह भाजपा के क्षेत्रीय संगठन मंत्री बने, फिर आला कमान ने उन्हें 1997 और 2002 में भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री बनाया।

उत्तराखंड राज्य बनने के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पहली बार 2002 में हुए विधानसभा चुनाव में डोईवाला से जीत दर्ज की। उन्होंने अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा और 2007 में हुए विधानसभा चुनाव में डोईवाला से एक बार फिर विजयश्री प्राप्त की। वह वर्ष 2007 से 2012 तक भाजपा सरकार में कृषि मंत्री रहे। 2017 में वह मुख्यमंत्री बने लेकिन सियासी उठा पटक के बीच 2021 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी त्रिवेंद्र सिंह रावत के समर्थन में रैली करने के आये और उन्होंने हरिद्वार में रैली को भी संबोधित किया। इस अवसर पर हिल मेल ने उनसे बातचीत की, सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस बार के संकल्प पत्र की थीम मोदी की गारंटी है। ये चुनाव नेशन फर्स्ट बनाम फ़ैमली फर्स्ट के बीच है। जातिवाद बनाम राष्ट्रवाद के बीच है। सीएम योगी ने कहा कि यह चुनाव विकास बनाम कांग्रेस की विनाशकारी नीति के बीच है। राम मंदिर का इस्तेमाल हमनें चुनाव के लिए नहीं किया। काम हुआ है तो नाम भी होगा। पहले ग़रीबों के घर बने और उसके बाद राम का मंदिर बना तो उसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है।

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