Friday , 4 September 2026
Home उत्तराखंड न्यूज़ राज्य के तीन लाख से अधिक किसानों की बदलेगी किस्मत
उत्तराखंड न्यूज़देश-विदेशदेहरादून

राज्य के तीन लाख से अधिक किसानों की बदलेगी किस्मत

राज्य सरकार किसानों को परम्परागत खेती के बजाय नगदी फसल उगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। जिससे कुल मिलाकर 3 लाख 17 हजार से अधिक किसान लाभांवित होंगे।
राज्य सरकार किसानों को परम्परागत खेती के बजाय नगदी फसल उगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसी क्रम में राज्य कैबिनेट ने बीते दिनों मिलेट्स पॉलिसी, कीवी नीति और ड्रैगन फ्रूट खेती की योजना पर मुहर लगाई है, जिसमें कुल मिलाकर 3 लाख 17 हजार से अधिक किसान लाभांवित होंगे। उत्तराखण्ड स्टेट मिलेट्स पालिसी के तहत राज्य सरकार ने 2030-31 तक 11 पर्वतीय जिलों के लिए कुल 134.89 करोड रुपए की कार्ययोजना पर मुहर लगाई है। इसमें मण्डुवा, झंगोरा, रामदाना, कौणी एवं चीना उत्पादक किसानों को बीज एंव जैव उर्वरक पर 80 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा, साथ ही कृषको को मिलेट की बुवाई करने पर पंक्ति बुवाई पर 4 हजार रुपये प्रति हैक्टेयर और सीधी बुवाई पर 2 दो हजार रुपये प्रति हैक्टेयर की प्रोत्साहन धनराशि दी जायेगी। मिलेट पॉलिसी के तहत प्रत्येक वर्ष विकासखण्ड स्तर पर उत्कृष्ट कार्य के लिए 2 कृषक व समूह को पुरस्कार किया जायेगा। साथ ही प्रत्येक विकासखण्ड स्तर पर 1 मिलेट प्रसंस्करण इकाई की स्थापना की जायेगी। योजना के तहत 3 लाख से अधिक किसानों को लाभ देने का लक्ष्य है। सरकार इसके तहत श्रीअन्न फूड पार्क की स्थापना भी करेगी। इसी तरह उत्तराखण्ड कीवी नीति के तहत वर्ष 2030-31 तक राज्य सरकार कीवी उघान स्थापना के लिए कुल लागत 12 लाख प्रति एकड़ का 70 प्रतिशत राजसहायता प्रदान करेगी। जिसमें 30 प्रतिशत लाभार्थी का अंश होगा। यह नीति भी हरिद्वार एवं उधमसिंहनगर को छोड़कर राज्य के शेष 11 जनपदों में लागू होगी। कीवी पालिसी के अन्तर्गत कुल 894 करोड रुपये की कार्ययोजना तैयार की गई है, नीति के तहत 3500 हैक्टेयर क्षेत्रफल को आच्छादित किये जाने का लक्ष्य है, जिसमे करीब 17500 किसान लाभान्वित होंगे। अभी राज्य के लगभग 683 हैक्टेयर के क्षेत्रफल में 382 मैट्रिक टन कीवी का उत्पादन किया जा रहा है।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

प्रेशर हॉर्न पर अब सख्ती, दूसरी बार पकड़े जाने पर ₹10 हजार चालान

उत्तराखंड में वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने और उनका अनावश्यक इस्तेमाल करने...