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29 अगस्त को होगा उत्तराखंड के पहले खेल विश्वविद्यालय का शिलान्यास, पहले चरण के लिए 26 करोड़ रुपये मंजूर

उत्तराखंड के हल्द्वानी में खेल शिक्षा और खेल प्रतिभाओं को नई दिशा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य के पहले खेल विश्वविद्यालय का शिलान्यास 29 अगस्त, राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पहले चरण के निर्माण कार्यों के लिए 26 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत हो चुकी है। शासन स्तर पर तैयारियां अंतिम चरण में हैं और शिलान्यास कार्यक्रम को भव्य बनाने की योजना बनाई जा रही है।

खेल विश्वविद्यालय के कुलपति अमित कुमार सिन्हा ने बताया कि पहले चरण में स्वीकृत 26 करोड़ रुपये से प्रारंभिक निर्माण कार्य कराए जाएंगे। इसके बाद विश्वविद्यालय के विस्तार और आधुनिक सुविधाओं के विकास के लिए दूसरे चरण में 350 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया है। पूरी परियोजना को चार से पांच चरणों में पूरा करने की योजना है, ताकि इसे राष्ट्रीय स्तर का अत्याधुनिक खेल शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान बनाया जा सके।

उन्होंने बताया कि शासनादेश जारी होने के बाद निर्माण एजेंसी पेयजल निर्माण निगम को कार्य सौंप दिया जाएगा और निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। शिलान्यास कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस संबंध में प्रदेश की खेल मंत्री रेखा आर्या भी अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर चुकी हैं और समयबद्ध तरीके से सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

पहले सत्र से शुरू होंगे आधुनिक खेल पाठ्यक्रम

विश्वविद्यालय में पहले शैक्षणिक सत्र से ही रोजगारपरक और आधुनिक खेल शिक्षा से जुड़े कई नए पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी है। इनमें बीएससी स्पोर्ट्स साइंस, बीएससी स्पोर्ट्स मैनेजमेंट, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म और विभिन्न स्पोर्ट्स डिप्लोमा पाठ्यक्रम शामिल हैं। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य केवल खिलाड़ियों को तैयार करना ही नहीं, बल्कि खेल प्रबंधन, खेल विज्ञान, खेल मीडिया और फिटनेस उद्योग के लिए प्रशिक्षित पेशेवर तैयार करना भी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना से उत्तराखंड के युवाओं को राज्य से बाहर गए बिना उच्च स्तरीय खेल शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाले खिलाड़ियों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, शोध और आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

खेल प्रतिभाओं को मिलेगा नया मंच

उत्तराखंड लंबे समय से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों को तैयार करता रहा है, लेकिन खेल शिक्षा और अनुसंधान के लिए समर्पित विश्वविद्यालय का अभाव महसूस किया जाता था। खेल विश्वविद्यालय बनने से खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, फिजियोथेरेपी, स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन, स्पोर्ट्स साइकोलॉजी और हाई-परफॉर्मेंस कोचिंग जैसी सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध हो सकेंगी।

राज्य सरकार का लक्ष्य इस संस्थान को भविष्य में देश के प्रमुख खेल विश्वविद्यालयों में शामिल करना है, जिससे उत्तराखंड खेल शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में नई पहचान बना सके।

नई खेल नीति के लिए जनता से मांगे जाएंगे सुझाव

इसी बीच राज्य का खेल विभाग नई राज्य खेल नीति तैयार करने की दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है। कुलपति अमित कुमार सिन्हा ने बताया कि नई खेल नीति को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाने के लिए खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, खेल विशेषज्ञों, खेल प्रेमियों और आम जनता से सुझाव लिए जाएंगे।

इसके लिए जल्द ही खेल विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर एक विशेष व्यवस्था शुरू की जाएगी, जहां लोग अपने सुझाव ऑनलाइन भेज सकेंगे। विभाग का मानना है कि जनभागीदारी से तैयार होने वाली खेल नीति प्रदेश की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप होगी और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद करेगी।

नई खेल नीति में प्रतिभाओं की पहचान, ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं का विस्तार, महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहन, आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्था, खेल छात्रवृत्ति, रोजगार के अवसर और खेल अधोसंरचना के विकास जैसे विषयों को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है।

खेल शिक्षा के क्षेत्र में नया अध्याय

29 अगस्त को होने वाला यह शिलान्यास उत्तराखंड में खेल शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। विश्वविद्यालय के निर्माण के बाद राज्य के खिलाड़ियों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, आधुनिक प्रशिक्षण और अनुसंधान की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही नई खेल नीति और खेल विश्वविद्यालय का संयोजन उत्तराखंड को खेलों के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सरकार को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह विश्वविद्यालय राज्य को राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर एक मजबूत पहचान दिलाएगा।

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