रक्षा थिंक टैंक भारत शक्ति द्वारा आयोजित भारत रक्षा सम्मेलन 2025 में एक बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि मई में किए गए निर्णायक सैन्य अभियान के बाद, हमारे पास पाकिस्तान के कोने-कोने में आइएसआर (खुफिया, निगरानी और टोही) और गतिज संचालन क्षमताएं होनी चाहिए, जो मुझे लगता है कि नई सामान्य बात होगी।
सशस्त्र बलों के लिए नई सामान्य स्थिति में तब्दील होना चाहिए। इसका मतलब होगा चौबीस घंटे बेहतर परिचालन तैयारी, जो मुझे लगता है कि बहुत आवश्यक है। हमें अपनी वायु रक्षा, काउंटर यूएएस (मानव रहित हवाई प्रणाली), इलेक्ट्रानिक युद्ध में बेहतर तैयारी करनी चाहिए, यह नई सामान्य स्थिति होनी चाहिए क्योंकि हम इसी तरह के युद्ध की उम्मीद कर रहे हैं।
वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने सेना के लिए प्रस्तावित थिएटर संबंधी योजना पर कहा कि तीनों सेनाओं के बीच तालमेल के लिए एक नया ढांचा बनाने का कोई भी फैसला राष्ट्रीय हित में होगा और इस पर विचार-विमर्श चल रहा है।
एक संवाद सत्र में एयर चीफ मार्शल ने ड्रोन के इस्तेमाल से संबंधित मुद्दों को संभालने के लिए तीनों सेनाओं, अर्धसैनिक बलों और कुछ नागरिक संस्थाओं को मिलाकर एक संयुक्त ढांचा बनाने की भी वकालत की। उन्होंने इस धारणा को भी खारिज किया कि भारतीय वायुसेना (आइएएफ) सुधार पहल का विरोध कर रही है और सुझाव दिया कि नए सुधार उपाय को सावधानीपूर्वक चर्चा और विश्लेषण के बाद आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने कहा कि नौसेना में हर 40 दिन में एक नया स्वदेशी युद्धपोत या पनडुब्बी शामिल की जा रही है। उन्होंने सुरक्षा संबंधी विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए समुद्री क्षेत्र में संप्रभु क्षमता निर्माण के प्रयासों को भी रेखांकित किया।
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय नौसेना ने आत्मनिर्भरता को न केवल रणनीतिक अनिवार्यता के रूप में अपनाया है, बल्कि भविष्य के आश्वासन के लिए एक निवेश के रूप में भी अपनाया है। उन्होंने कहा कि बल का लक्ष्य 2035 तक 200 से अधिक युद्धपोतों और पनडुब्बियों का संचालन करना है।
इस दौरान थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि जटिल खतरों से भरी दुनिया में कोई भी देश अकेले सुरक्षित नहीं है और साझा रक्षा नवाचार ही “सबसे मजबूत ढाल” है। उन्होंने कहा कि भारत की “ढाई मोर्चों की चुनौती” और “आपरेशन सिंदूर के बाद का सशक्तिकरण” सशस्त्र बलों को क्रमिक विकास और सेना में शामिल होने के लिए अधिक लचीलापन दे रहा है।
वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, रक्षा विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों और अन्य लोगों की एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने युद्ध की बदलती प्रकृति और क्षमताओं के निर्माण, रक्षा अनुसंधान एवं विकास में निवेश और उभरती प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
क्या है थिएटर मॉडल : ‘थिएटर मॉडल’ के तहत, सरकार थलसेना, वायुसेना और नौसेना की क्षमताओं को एकीकृत करना चाहती है और युद्धों तथा अभियानों के लिए उनके संसाधनों का बेहतर उपयोग करना चाहती है। प्रत्येक थिएटर कमांड में थलसेना, नौसेना व वायुसेना की इकाइयां होंगी ये सभी एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए एक इकाई के रूप में काम करेंगी। वर्तमान में थलसेना, नौसेना, वायुसेना की अलग-अलग कमान हैं।


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