उत्तराखण्ड में गन्ने का मूल्य हुआ 375 व 365 घोषित, धामी कैबिनेट ने 17 प्रस्तावों पर लगाई मोहर

उत्तराखण्ड में गन्ने का मूल्य हुआ 375 व 365 घोषित, धामी कैबिनेट ने 17 प्रस्तावों पर लगाई मोहर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई। मंत्रिमंडल ने आबकारी नीति को भी मंजूरी दे दी है। इसके साथ विभिन्न विभागों से संबंधित महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई। मंत्रिमंडल ने आबकारी नीति को भी मंजूरी दे दी है। इसके साथ विभिन्न विभागों से संबंधित महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। कैबिनेट बैठक ने 17 मामलों में अपनी मोहर लगा दी हे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में 17 प्रस्ताव आए। सीएम की घोषणा के तहत उत्तराखंड आंदोलन और सांस्कृतिक विरासत का इतिहास कक्षा 6 से 8 तक हमारी विरासत एवं विभूतियां पढ़ाए जाने के प्रस्ताव पर मुहर लगी।

कैबिनेट समाप्त होने के बाद सचिव गृह शैलेश बगोली ने जानकारी दी। कक्षा 10 के बाद जो छात्र तीन वर्षीय पॉलिटेक्निक डिप्लोमा करते हैं, उन्हें कक्षा 12 के समकक्ष माना जाएगा। चीनी मिलों के लिए अगेती 375 रुपये, सामान्य प्रजाति 365 रुपए प्रति कुंतल की गई। जबकि गन्ना समर्थन मूल्य में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उप महानिरीक्षक, अधीक्षक कारागार की नियमावली पास की गई। भारतीय न्याय संहिता के तहत नियमालिओं को अनुमोदन किया गया। मंत्रिमंडल ने आबकारी नीति को भी मंजूरी दे दी है।

कैबिनेट में लिए गए निर्णयों के अनुसार राज्य कर्मियों के लिए शिथिलीकरण का लाभ एक बार मिलेगा सकेगा। कुछ नियमावली में शिथिलीकरण की व्यवस्था की गई है। ये सभी कर्मचारियों के लिए लागू हो गई है। 50 प्रतिशत तक छूट इस नियमावली के अनुसार मिलेगी। राज्य संपत्ति विभाग की समूह-क व समूह-ख की सेवा नियमावली को अनुमोदन कैबिनेट ने किया है।

मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना लागू करने पर कैबिनेट ने मंजूरी दी है। स्वरोजगार के लिए 2 लाख रुपये तक मिलेंगे। पेंशन एवं हकदारी निदेशालय में कनिष्ठ सहायक के 13 पद सृजित करते के लिए कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। उत्तराखंड में यूपीएस लागू करने पर कैबिनेट ने अपनी मोहर लगा दी है। इसमें जो कर्मचारी चाहेंगे, वो इसमें आ सकेंगे। स्टाम्प व निबंधन विभाग में अधिकारियों व कर्मचारियों के पद 213 से बढ़ाकर 240 कर दिए हैं।

अपर पुलिस अधीक्षक उच्चतम वेतनमान की नियमावली को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। ट्राउट प्रोत्साहन योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। इस योजना के लिए 200 करोड़ का परिधान किया जाएगा। मत्स्य पालकों को 5 साल तक इनपुट दिया जाएगा जिस पर कैबिनेट ने अपनी मोहर लगा दी है। कार्मिक को रिवोल्विंग फंड इस्तेमाल करने की नियमावली को भी मंजूरी मिल गई हे।

उधमसिंह नगर स्थित प्रयाग फार्म की 1354 एकड़ भूमि इंडस्ट्री को दी जाएगी। जिसके लिए कैबिनेट बैठक में आया प्रस्ताव पास हो गया है। एकीकृत स्वयं सहायता योजना को मंजूरी मिली है। इसके लिए 2।3 करोड़ सीएलएफ के लिए प्राविधान किया गया है। गौला, कोसी, दाबका नदियों में सुरक्षा एवं सीमांत शुल्क आदि को रिवाइस किया गया। कैबिनेट ने नई आबकारी नीति को भी मंजूरी दे दी है।

राज्य की नई आबकारी नीति 2025 में धार्मिक स्थलों की महत्ता को ध्यान में रखते हुए उनके निकटवर्ती मदिरा अनुज्ञापनों को बंद करने का निर्णय लिया गया है। जनसंवेदनाओं को सर्वाेपरि रखते हुए, शराब की बिक्री पर और अधिक नियंत्रण किया जायेगा। उप-दुकानों और मैट्रो मदिरा बिक्री व्यवस्था को समाप्त किया गया है। नई आबकारी नीति में किसी दुकान पर एमआरपी से अधिक कीमत ली जाती है, तो लाइसेंस निरस्त करने का प्राविधान किया गया है। डिपार्टमेंटल स्टोर्स पर भी उतच लागू होगी, जिससे उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा होगी।

पिछले दो वर्षों में आबकारी राजस्व में राज्य में काफी वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 5060 करोड़ रुपये के राजस्व लक्ष्य को निर्धारित किया गया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 4000 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 4038।69 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 4439 करोड़ रुपये का लक्ष्य के सापेक्ष अब तक लगभग 4000 करोड़ रुपये की प्राप्ति हो चुकी है।

नई आबकारी नीति के तहत स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता और रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। थोक मदिरा अनुज्ञापन केवल उत्तराखंड निवासियों को जारी किए जाएंगे, जिससे राज्य में आर्थिक अवसर बढ़ेंगे। पर्वतीय क्षेत्रों में वाइनरी को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में उत्पादित फलों से वाइनरी इकाइयों को अगले 15 वर्षों तक आबकारी शुल्क में छूट दी जाएगी। इससे कृषकों और बागवानी क्षेत्र में कार्य करने वालों को आर्थिक लाभ मिलेगा। मदिरा उद्योग में निवेश को प्रोत्साहित करने के निर्यात शुल्क में कटौती की गई है। माल्ट एवं स्प्रिट उद्योगों को पर्वतीय क्षेत्रों में विशेष सुविधाएँ प्रदान की जाएंगी।

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