प्रदेश में बेरोजगारों का शिक्षक बनने का सपना सिस्टम ने तोड़ा

प्रदेश में बेरोजगारों का शिक्षक बनने का सपना सिस्टम ने तोड़ा

नई शिक्षा नीति में विशेषकर स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा में बदलाव के लिए जो परिवर्तन सुझाए गए हैं, हो सकता है उनके प्रभाव तात्कालिक तौर पर इतने अच्छे नहीं हों, लेकिन निश्चित रूप से भविष्य में ये प्रभावकारी साबित होगी।

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला

किसी भी राष्ट्र का उज्जवल भविष्य वहां के युवाओं के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। दृष्टिकोण परिवर्तन शिक्षा के जरिये ही संभव है। केंद्र सरकार, इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ‘नई शिक्षा नीति’ लाई है। यह नीति भारत के 1.3 अरब नागरिकों की अपेक्षाओं और सपनों के साथ राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। नई शिक्षा नीति सांस्कृतिक जागरूकता सहानुभूति वैज्ञानिक उत्कृष्टता और जनोपयोगी दक्षता के उद्देश्य से चलाया गया एक ऐसा कार्यक्रम है जिससे न केवल राष्ट्र समुन्नत होगा बल्कि राष्ट्रीय चरित्र का भी विकास होगा।

इस नीति में विशेषकर स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा में बदलाव के लिए जो परिवर्तन सुझाए गए हैं, हो सकता है उनके प्रभाव तात्कालिक तौर पर इतने अच्छे नहीं हों, लेकिन निश्चित रूप से भविष्य में ये प्रभावकारी साबित होगी। मदन मोहन मालवीय और ज्योतिबा फुले जिन परिकल्पना के साथ समाज को शिक्षित करना चाहते थे वह, इसी नई शिक्षा नीति का बीज बोना चाहते थे लेकिन अब उत्तराखंड में सिस्टम ने बेरोजगारों का शिक्षक बनने का सपना तोड़ दिया। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से सहायक अध्यापक एलटी के 1,544 पदों के लिए हुई भर्ती में शासन के आदेश के बाद भी आयोग ने कुछ अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट नहीं दी। हालांकि, शासन का यह आदेश शिक्षक भर्ती परीक्षा से ठीक एक दिन पहले जारी हुआ।

आयोग के सचिव बताते हैं कि परीक्षा के लिए प्रवेशपत्र जारी होने के बाद इस तरह के आदेश पर अमल कर पाना संभव नहीं है। शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक एलटी के पदों पर भर्ती के लिए वर्ष 2020 में आवेदन मांगे गए थे। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से कला विषय के बीएड उपाधिधारकों के लिए यह आवेदन मांगे गए थे। बाद में इस भर्ती में कला विषय के नॉन बीएड अभ्यर्थियों को भी शामिल किया गया। शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों के मुताबिक, आठ अगस्त 2021 को भर्ती के लिए परीक्षा हुई। परीक्षा के बाद अभ्यार्थी रिजल्ट का इंतजार करते रहे, लेकिन कुछ बीएड अभ्यर्थियों के कोर्ट जाने के बाद वर्ष 2023 में भर्ती रद्द कर दी गई। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से चार साल बाद 18 अगस्त 2024 को सहायक अध्यापकों के 1,544 पदों के लिए भर्ती परीक्षा कराई गई, लेकिन शासन के आदेश के बाद भी इस भर्ती में कुछ ऐसे अभ्यर्थी शामिल नहीं हो पाए। जिनकी भर्ती के इंतजार में इन चार वर्षों में भर्ती की अधिकतम आयु सीमा निकल गई।

शिक्षक भर्ती 18 अगस्त को थी, लेकिन शासन ने आयोग को 17 अगस्त को लिखे पत्र में कहा, सहायक अध्यापक एलटी की कला विषय की 2020 की भर्ती रद्द हो गई थी। जिन अभ्यर्थियों ने उस दौरान भर्ती के लिए आवेदन किया था, वे उस समय निर्धारित आयु सीमा के तहत अर्ह थे, लेकिन इस भर्ती में वे आयु सीमा के आधार पर अर्ह नहीं हैं। वर्तमान भर्ती में इन्हें आयु सीमा में छूट दी जाए या इनके वर्ष 2020 के आवेदन को मंजूर किया जाए। पिछली भर्ती केवल एलटी कला की थी, उनके लिए आयोग ने विकल्प रखा था, जिसे सरकार को भेजते हुए कहा गया था कि बहुत सारे अभ्यर्थी आयु सीमा पार कर जाएंगे, लेकिन सरकार से निर्देश नहीं आया। जो कोर्ट गए थे, उन्हें भर्ती में शामिल किया गया, पर आयु सीमा पार कर चुके अन्य को परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया।

परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र जारी होने के बाद या आवेदन की तिथि निकल जाने के बाद उन्हें परीक्षा में शामिल करना संभव नहीं था। यही वजह है कि आज अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूल की बजाय निजी स्कूलों में पढ़ाना बेहतर समझते हैं। सरकारी स्कूलों के हाल ऐसे हैं, जिसे बयां नहीं किया जा सकता है। भारत सरकार की शिक्षा पर आधारित योजना है। जिसका मकसद देश के हर शख्स को साक्षर बनाना है। ये योजना 2022-2027 के लिए लागू की गई है। इसके तहत 15 साल से ज़्यादा उम्र के असाक्षर लोगों को प्राथमिक शिक्षा दी जाती है। ये ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यम में चलती है। इस योजना को स्वैच्छिक सेवा के तौर पर चलाया जाता है। इस योजना के तहत, शिक्षार्थियों और वीटी की पहचान की जाती है और उन्हें उल्लास मोबाइल ऐप पर रजिस्टर किया जाता है। इसके अलावा पढ़ाई के सभी सामग्री और संसाधन रजिस्टर्ड स्वयंसेवकों के लिए डिजिटल तरीके से उपलब्ध कराए जाते हैं।

एक गुरु को हमारे देश में भगवान से भी ऊपर का दर्जा दिया जाता है। शिक्षकों को विश्वभर में सम्मान की नजर से देखा जाता है। अगर आपका सपना ही एक अध्यापक बनने का है तो इस क्षेत्र में विभिन्न कोर्सेज मौजूद हैं जिनको करके आप सरकारी अध्यापक बनने की योग्यता हासिल कर लेते हैं। आप ये कोर्स बारहवीं के बाद से ही कर सकते हैं। इसके अलावा कुछ ऐसे भी कोर्स हैं जिन्हें स्नातक के बाद किया जा सकता है। परास्नातक कोर्स करने के लिए आपका ग्रेजुएट होना अनिवार्य है। कई शिक्षक राजनीति से प्रेरित होते हैं और सियासी दलों से जुड़े हुए हैं। यह स्कूली अनुशासन को बर्बाद कर सकता है। राज्य सरकारें न केवल पढ़ाने के लिए बल्कि चुनाव, जनगणना और अन्य कार्यों के प्रबंधन में भी शिक्षकों का इस्तेमाल करती हैं। एक शिक्षक को मंदिर में पुजारी बनने के लिए भी कहा गया था। शिक्षक संघ शक्तिशाली हैं और किसी भी बदलाव का विरोध करते हैं।

स्कूल और कॉलेज दोनों में कई शिक्षकों का कहना है कि उनका करियर उनके छात्रों के परिणामों से ज्यादा राजनीतिक संबंधों पर निर्भर करता है। जब पूरा पारिस्थितिकी तंत्र खराब हो जाता है, तो बदलाव मुश्किल होता है। ढांचे को तोड़ना भारी प्रतिरोध का सामना करता है। किसी भी राष्ट्र का उज्जवल भविष्य वहां के युवाओं के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। दृष्टिकोण परिवर्तन शिक्षा के जरिये ही संभव है। केंद्र सरकार, इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ‘नई शिक्षा नीति’ लाई है। यह नीति भारत के 1.3 अरब नागरिकों की अपेक्षाओं और सपनों के साथ राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। नई शिक्षा नीति सांस्कृतिक जागरूकता सहानुभूति वैज्ञानिक उत्कृष्टता और जनोपयोगी दक्षता के उद्देश्य से चलाया गया एक ऐसा कार्यक्रम है जिससे न केवल राष्ट्र समुन्नत होगा बल्कि राष्ट्रीय चरित्र का भी विकास होगा। इस नीति में विशेषकर स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा में बदलाव के लिए जो परिवर्तन सुझाए गए हैं, हो सकता है उनके प्रभाव तात्कालिक तौर पर इतने अच्छे नहीं हों, लेकिन निश्चित रूप से भविष्य में ये प्रभावकारी साबित होगी।

(यह लेखक के निजी विचार हैं और वह दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं)।

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