Sunday , 6 September 2026
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विश्वविद्यालय ने देश के उत्तर पूर्वी राज्यों हेतु जौ की विकसित की नई प्रजाति

अखिल भारतीय समन्वित गेंहू एवं जौ परियोजना के अन्तर्गत भारतीय कृशि अनुसंधान परिषद की कृषि फसलों के लिए फसल मानकों की अधिसूचना और किस्मों के विमोचन पर केंद्रीय उप-समिति द्वारा विश्वविद्यालय द्वारा विकसित जौ की नई प्रजाति यू.पी.बी. 1106 (पन्त जौ 1106) का विमोचन के पश्चात कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा देश के बारह राज्यों क्रमश: पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, ओडिशा, पश्चिमी बंगाल, असम और पूर्वोत्तर राज्यों के मैदानी इलाके में खेती के लिए अधिसूचना जारी की गयी है।

गेहूं एवं जौ शोध परियोजना के समन्वयक डॉ. जे.पी. जासवाल ने बताया कि इस प्रजाति को विकसित करने में लगभग 12 वर्ष का समय लगा है। अनाज के लिए पन्त जौ 1106 छः पंक्ति वाली उच्च उत्पादन क्षमता वाली किस्म है। आई.सी.ए.आर. के भारतीय गेंहू एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल द्वारा देश स्तर पर विभिन्न परीक्षण केन्द्रों पर आयोजित परीक्षणों में इस प्रजाति ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। छः पंक्ति वाली जौ की यह प्रजाति देश के उत्तर पूर्वी राज्यों में लोकप्रिय किस्मों क्रमश: एच.यू.बी. 113 और डी.डब्ल्यू.आर.बी. 137 की तुलना में क्रमश: 19.94 प्रतिशत और 10.32 प्रतिशत अधिक उपज दी है।

यह किस्म भूरे और पीले रंग के रतुआ के लिए प्रतिरोधी है तथा जौ की महत्वपूर्ण बीमारी झुलसा के लिए बेहतर प्रतिरोध का प्रदर्शन किया है। साथ ही यू.पी.बी. 1106 लॉजिंग टॉलरेंट है, जो किसानों के खेत में उपज क्षमता का एहसास करने के लिए एक वांछनीय विशेषता है। गुणवत्ता विश्लेषण में यूपीबी 1106 ने चैक प्रजाति डीडब्ल्यूआरबी 137 (11.2 प्रतिशत) और एचयूबी 113 (11.7 प्रतिशत) की तुलना में बेहतर प्रोटीन की मात्रा (12.3 प्रतिशत) दिखाई और अन्य गुणवत्ता मापदंडों में भी खरी उतरी है। यह प्रजाति उत्तर पूर्वी मैदानी क्षेत्र में समय पर बुवाई वाली सिंचित परिस्थितियों में जौ के उत्पादन में वृद्धि करने में सहायक सिद्व होगी।

जौ अपने पोशक तत्वों के लिए सर्वविदित है। यह घुलनशील रेशा, विशेष रूप से बीटा-ग्लूकन से भरपूर एक सम्पूर्ण अनाज है, जो शरीर की चर्बी कम करने और वजन को नियंत्रित करने में सहायक साबित हुआ है। बीटा-ग्लूकन परिपूर्णता की भावना को बढ़ाता है, पाचन को धीमा करता है और इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाता है, जिससे वजन घटाने और बेहतर चयापचय स्वास्थ्य में योगदान मिलता है।

मल्टीग्रेन की लोकप्रियता बढ़ी है जिसमें जौ एक महत्वपूर्ण अवयव है और मधुमेह के नियंत्रण में भी इसकी अहम भूमिका है। अतः जौ की यू.पी.बी. 1106 (पन्त जौ 1106) प्रजाति से जौ के उत्पादन में ही वृद्धि नहीं होगी बल्कि इसमें निहित पोषक तत्व स्वास्थ्य लाभ में भी वृद्धि करने में सहायक सिद्व होंगे।

इस प्रजाति का विकास आनुवां​​शिकी एवं पादप प्रजनन विभाग के वैज्ञानिक डॉ. जे.पी. जायसवाल, डॉ. स्वाती एवं डॉ. अनिल कुमार द्वारा किया गया है। इस प्रजाति को विकसित करने के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान, निदेशक शोध डॉ. ए.एस. नेन एवं अधिष्ठाता कृषि डॉ. सुभाष चन्द्रा ने वैज्ञानिकों को बधाई दी है।

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Hill Mail

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