Tuesday , 15 September 2026
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एक कर्नल ऐसा भी जिसने जनसेवा के लिए छोड़ी सभी सरकारी सुविधाएं

उत्तराखंड की राजनीति में एक मिसाल कायम करते हुए कर्नल (सेवानिवृत्त) अजय कोठियाल ने पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष के तौर पर मिलने वाली समस्त सरकारी सुविधाएं त्याग दी हैं। यह निर्णय उस चिट्ठी से सामने आया है जो कर्नल कोठियाल ने सैनिक कल्याण निदेशालय को भेजी है।

पूर्व सैनिकों के कल्याण हेतु कर्नल (रि.) अजय कोठियाल का अनुकरणीय निर्णय

उत्तराखंड की राजनीति में एक मिसाल कायम करते हुए कर्नल (सेवानिवृत्त) अजय कोठियाल ने पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष के तौर पर मिलने वाली समस्त सरकारी सुविधाएं त्याग दी हैं। कर्नल अजय कोठियाल ने इन सुविधाओं की कुल वार्षिक राशि लगभग 25 लाख रुपये, पूर्व सैनिकों के कल्याण हेतु समर्पित कर दी है।

यह निर्णय उस चिट्ठी से सामने आया है जो कर्नल कोठियाल ने सैनिक कल्याण निदेशालय को भेजी है। तीन पृष्ठों की इस चिट्ठी में उन्होंने न केवल वर्तमान में प्रदेश में चल रहे सैनिक कल्याण से जुड़े कार्यों का उल्लेख किया है, बल्कि अपनी भावनाओं व दृष्टिकोण को भी स्पष्ट रूप से साझा किया है।

मिलने वाली सरकारी सुविधाएं इस प्रकार हैं :

वाहन व्यय: ₹80,000 प्रति माह
आवास/कार्यालय व्यय: ₹25,000 प्रति माह
टेलीफोन/मोबाइल: ₹2,000 प्रति माह
कार्मिकों का मानदेय: ₹27,000 प्रति माह
स्वयं का मानदेय: ₹45,000 प्रति माह
यात्रा भत्ता: ₹40,000 प्रति माह

कुल मासिक राशि: ₹2,19,000
वार्षिक योग: ₹25,00,000 (लगभग)

कर्नल अजय कोठियाल का यह कदम न केवल राजनीति में नैतिकता और शुचिता की भावना को जीवंत करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम भी हो सकती है।

जहां आज अधिकांश राजनेता सुविधाओं की होड़ में लगे हैं, वहीं कर्नल कोठियाल का यह त्याग प्रेरणादायक है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है।

कर्नल अजय कोठियाल 7 दिसंबर 1992 में गढ़वाल राइफल की 4वीं बटालियन में सेकेंड लेफ्टिनेंट के पद पर भारतीय सेना में शामिल हुए थे। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने अनेक बहादुरी भरे काम किये हैं उन्होंने जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन भी चलाये, जिसमें उन्हें पैर में गोली भी लगी थी।

अदम्य साहस के लिए उन्हें कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया है। वह 26 अप्रैल 2013 से 26 अप्रैल 2018 तक नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) के प्रधानाचार्य भी रहे।

उत्तराखंड में साल 2013 में आई विनाशकारी हिमालयन सुनामी के बाद शुरू हुए निर्माण कार्यों और खासकर केदारनाथ पुनर्निर्माण की कहानी कर्नल (रिटा.) अजय कोठियाल के जिक्र के बिना अधूरी है। केदारपुरी जिस दिव्य और भव्य स्वरूप में आज नजर आ रही है, उसका श्रेय कर्नल अजय कोठियाल और उनके निर्देशन में बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में काम करने वाली टीम को जाता है। 29 अगस्त 2018 को कर्नल अजय कोठियाल ने स्वैच्छिक सेवानिवृति ली।

उन्होंने यूथ फाउंडेशन नामक संस्था की स्थापना की जिसके माध्यम से गरीब परिवार के बच्चों को सेना और अर्द्धसैनिक बलों में भेजने का प्रशिक्षण दिया जाता है और उनमें से कई बच्चे आज भारतीय सेना और अर्ध सैनिक बल का हिस्सा बने हुए है। कर्नल कोठियाल की प्रेरणा से चल रहा यूथ फाउंडेशन अब एक मिशन बन चुका है।

कर्नल कोठियाल ने यह स्पष्ट किया है कि उनका राजनीति में आना केवल सत्ता सुख पाने के लिए नहीं, बल्कि सेवा भावना से प्रेरित होकर प्रदेश और पूर्व सैनिकों की बेहतरी के लिए है।

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Hill Mail

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