उत्तराखंड का जोशीमठ आज सुर्खियों में हैं, 561 से ज्यादा मकानों में दरारों, सैकड़ों परिवारों के पलायन, सड़कों पर पैदा हुई बड़ी बड़ी खाइयों ने राष्ट्रीय स्तर पर चिंता पैदा कर दी है।
जोशीमठ नगर प्राचीन, आध्यात्मिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है लेकिन नगर के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। नगर में जगह-जगह से हो रहा भू-धंसाव लगातार बढ़ता जा रहा है। वही केंद्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट ने जोशीमठ की आपदा पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस समय संयम से काम लेते हुए पहली प्राथमिकता आपदा ग्रस्त इलाके से लोगों को निकालकर सुरक्षित क्षेत्रों में स्थानांतरित कर हर प्रकार की व्यवस्था करने एवं लोगों की जानमाल बचाने की है।

भट्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पूर्व में ही आवश्यक निर्देश देने के बाद पूरे जोशीमठ आपदा की समीक्षा की है, जिसमें बड़े फैसले लिये हैं तथा वह स्वंय भी स्थलीय निरीक्षण के लिए जा रहे है। सुरक्षा की दृष्टि से पहले ही एनटीपीसी के काम रोक दिए है। रोपवे का संचालन बंद कर दिया गया है तथा सारे निर्माण कार्यों में भी फिलहाल रोक लगा दी है एवं प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मारवाडी, मनोहर बाग, सिंहधार, रविबाग, कोटलागढ़, गांधीनगर वार्ड एवं सुनील वार्ड पर एवं दरार वाले अन्य क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि राहत शिविरों में लोगों को हर प्रकार से ठंड से बचाने का कार्य एवं सभी आवश्यक वस्तुएं मुहैया कराई जा रही है। भट्ट ने लोगों से मनोबल बनाए रखने की अपील की है।


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