हिल मेल ब्यूरो, नैनीताल
नैनीताल की मशहूर नैनी झील को बेहतर बनाने या यूं कहें कि संवारने में संयुक्त राष्ट्र मदद करेगा। इसका श्रेय जाता है कि यहां के जिलाधिकारी सविन बंसल को। उनके प्रयासों का ही नतीजा है कि नैनीताल की इस खूबसूरत झील को अब जीवनदान मिलेगा। आपको बता दें कि इसरो के वैज्ञानिकों ने झील की बैथीमेट्री स्टडी कर डेप्थ मैपिंग, जल गुणवत्ता का विश्लेषण, पीएच लेवल, डीओ और क्लोरीन आदि पर एक रिपोर्ट तैयार की थी। इसके आधार पर संयुक्त राष्ट्र ने नैनी झील की सतत निगरानी परियोजना को मंजूरी दी है।
खास बात यह है कि जिला प्रशासन ने बैथीमेट्री स्टडी के रिजल्ट को यूएनडीपी को भेजा था। इसके बाद यूएन ने झील के पानी की सतत निगरानी के लिए परियोजना को मंजूरी प्रदान की। गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र ने भारत में पहली बार किसी झील के स्टडी प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। अच्छी बात यह है कि अब झील को लेकर होने वाले वित्तीय और तकनीकी कार्य संयुक्त राष्ट्र की तरफ से निशुल्क कराए जाएंगे। नैनी झील की बेहतरी के लिए डीएम सविन बंसल द्वारा किए गए प्रयासों की पूरे प्रदेश में प्रशंसा हो रही है।
नवंबर में इसरो के वैज्ञानिकों का एक दल नैनीताल आया था, जिसने नैनी झील का तकनीकी तौर पर अध्ययन किया। हाईटेक मशीनों से झील की गहराई नापी गई और झील की तलहटी में जमा मलबे और दूसरे पदार्थों का भी अध्ययन किया गया। वैज्ञानिकों ने सोनार सिस्टम की मदद से झील का अध्ययन किया था। इस रिपोर्ट के आधार पर नैनी झील की सेहत सुधारने की कवायद शुरू की गई।
डीएम सविन बंसल ने बताया कि झील के पानी की सतत निगरानी के लिए यूएन ने परियोजना स्वीकृत कर दी है। प्रोजेक्ट का बजट 55 लाख रुपये है, जिसका एमओयू जल्द होगा। प्रोजेक्ट के तहत यूएन की तरफ से झील के दोनों छोर पर पानी की गुणवत्ता चेक करने के लिए सेंसर लगाए जाएंगे। लोगों को पानी की गुणवत्ता की जानकारी देने के लिए तल्लीताल में गांधी मूर्ति के पास एलईडी मॉनीटर लगाया जाएगा। इसके साथ ही एनआईएच से झील के आंतरिक जल स्रोतों का सर्वे भी कराया जाएगा।


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