केदारनाथ में वीआईपी सिस्टम पर बवाल: तीर्थ पुरोहितों का प्रदर्शन, डेढ़ घंटे तक गूंजे विरोध के नारे

केदारनाथ में वीआईपी सिस्टम पर बवाल: तीर्थ पुरोहितों का प्रदर्शन, डेढ़ घंटे तक गूंजे विरोध के नारे

उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर परिसर में वीआईपी दर्शन व्यवस्था को लेकर शुक्रवार को तीर्थ पुरोहितों का आक्रोश खुलकर सामने आया। वीआईपी गेट और कथित विशेषाधिकार व्यवस्था के खिलाफ करीब 50 तीर्थ पुरोहितों ने जोरदार प्रदर्शन किया और “वीआईपी गेट बंद करो” तथा “वीआईपी सिस्टम खत्म करो” जैसे नारे लगाए। इस विरोध के चलते मंदिर परिसर में लगभग डेढ़ घंटे तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

घटना की शुरुआत तब हुई जब कुछ लोग वीआईपी गेट के जरिए मंदिर में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान यह सूचना फैली कि कुछ तीर्थ पुरोहितों को भी अंदर जाने से रोका जा रहा है। इस खबर से पुरोहितों में नाराजगी फैल गई और वे तत्काल वीआईपी गेट के पास एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। उनका कहना था कि इस तरह की व्यवस्था से आम श्रद्धालुओं को दर्शन करने में भारी असुविधा होती है और धार्मिक समानता की भावना भी प्रभावित होती है।
प्रदर्शन के दौरान तीर्थ पुरोहितों ने स्पष्ट रूप से कहा कि केदारनाथ जैसे पवित्र धाम में किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। उनका मानना है कि वीआईपी संस्कृति से न केवल आम भक्तों को परेशानी होती है, बल्कि मंदिर की पारंपरिक व्यवस्था और गरिमा पर भी असर पड़ता है।
स्थिति को संभालने के लिए हेमंत द्विवेदी, जो बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हैं, मौके पर पहुंचे। उन्होंने तीर्थ पुरोहितों से वार्ता कर उनकी नाराजगी के कारणों को समझा और स्पष्ट किया कि किसी को भी मंदिर में प्रवेश से रोकने का कोई निर्देश उनकी ओर से जारी नहीं किया गया था।
वार्ता के दौरान यह सामने आया कि पूरी स्थिति एक गलतफहमी के कारण उत्पन्न हुई थी। कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा बीकेटीसी अध्यक्ष के आदेश का हवाला देते हुए तीर्थ पुरोहितों को रोकने की बात कही गई थी, जो बाद में पूरी तरह भ्रामक साबित हुई। इस स्पष्टीकरण के बाद धीरे-धीरे माहौल शांत हुआ और प्रदर्शन समाप्त हो गया।
केदार सभा के अध्यक्ष राजकुमार तिवारी ने भी कहा कि गलत सूचना के कारण यह विवाद खड़ा हुआ, लेकिन समय रहते बातचीत के जरिए इसे सुलझा लिया गया। वहीं, बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि वीआईपी व्यवस्था की आड़ में कुछ लोग विशेष प्रवेश का लाभ लेने की कोशिश कर रहे थे, जिससे यह स्थिति बनी।
घटना के बाद प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाया है। संबंधित पुलिस अधिकारियों को हटा दिया गया है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने। द्विवेदी ने दोहराया कि तीर्थ पुरोहित इस पवित्र धाम की परंपराओं और व्यवस्थाओं का अहम हिस्सा हैं और उनके सम्मान व अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि धार्मिक स्थलों पर वीआईपी संस्कृति को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। ऐसे में जरूरी है कि व्यवस्थाएं पारदर्शी और समान हों, ताकि हर श्रद्धालु बिना भेदभाव के आस्था के इस केंद्र में दर्शन कर सके।

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